Friday, July 22, 2011

फूल , चाय और बारिश का पानी



 
फूल,चाय और बारिश का पानी 

बहुत दिनों के बाद ,
हम मिले...
हमें मिलना ही था , प्रारब्ध का लेखा ही कुछ ऐसा था .
मिलना , जुदा होना और फिर मिलना और फिर जुदा होना ......!!!

जब मिले तो देखा कि
उम्र से ज्यादा कहर ,
हम पर;
हमारी यादो ने ढाया था .
हम वो नहीं थे , जो जुदा होते वक़्त थे ..
हम वो थे, जो ,हम कभी थे ही नहीं ...

मैं तुम्हे और तुम मुझे बहुत देर तक यूँ ही देखते रहे
शायद हैरान थे और कुछ कोशिश आंसुओ को रोकने की भी थी
मुझे याद आया कि , जब  हम पहली बार मिले थे ,
तब भी इतना नहीं देखा था एक दुसरे को ;
वक़्त से शिकवा करे या ज़िन्दगी से ,
कुछ समझ नहीं आ रहा था ….
……. लब खामोश थे .!!

होटल के खुले आँगन में एक पेड़ जिसमे ;
दो लाल रंग के फूल खिले थे;
उसके नीचे बैठकर, हमने चाय मंगाई .
हमेशा की तरह दो सफ़ेद कप
और उनमे ज़िन्दगी की रंग वाली चाय
हमने चाय पीना शुरू  किया और
बेकार की बातो से एक दूसरे को टटोलना शुरू किया
जैसे ….कैसे हो
ज़िन्दगी कैसी है

निरर्थक से सवालों के
एक झूठा सा जवाब
सब अच्छा है ,
हर सवाल का यही जवाब था !!

हम थोड़ी थोड़ी देर में पीछे मुड जाते थे
जैसे किसी को देख रहे हो
[
जिसे उम्र भर देखना चाहा था ; वो सामने ही बैठा था ]
दरअसल ,हम अपने आंसुओ को पी जाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे.

बहुत देर की ख़ामोशी के बाद मैंने कहा
मेरी याद नहीं आती !

तुमने एक फीकी सी मुस्कराहट  को ओड़ कर कहा
नहीं ; अब नहीं आती है !!
पता नहीं ये सच था  या झूठ ,

तुमने पुछा ,
तुम्हे भी नहीं आती होंगी
दुनिया में मन लग जाता है
मैंने कहा
यहाँ बात दिल की है

मैंने पुछा ,
तुम्हे याद है सब कुछ
तुमने कहा , हाँ
तुमने मेरी देखकर कहा
और तुम्हे ?
मैंने कहा हाँमुझे सबकुछ बहुत अच्छे से याद है ,
in fact ,
मैं तो कुछ भी नहीं भूला हूँ
तुम्हे भी नहीं ...कभी नहीं ...!!

तुम रोने लगी
और मैं भी ;

आकाश में अचानक घुमड़ घुमड़ कर बादल आ गए थे
हलकी बूंदा बांदी शुरू हो गयी थी .

मैंने हाथ बढ़ाया  तुम्हारी ओर
तुम्हे बारिश से बचाने के लिए ,
होटल के shade  में ले जाना चाहता था
तुमने हिचकते हुए
मेरे हाथ में अपना हाथ दिया
उसी हाथ में ,
जिसे तुमने एक अजनबी से मोड़ पर छोड़ दिया था
समय भी कैसे कैसे पल दिखाता है हमें

तुम मेरे पास खड़ी थी
बारिश अब जोरो से होने लगी थी
मैंने तुमसे पुछा , याद है तुम्हे वो बारिश
तुमने मुस्करा कर कहा , कौनसी 
मैंने कहा  अरे वही उस पुराने शहर वाली बारिश
तुमने कहा कि हम कभी बारिश में भीगे ही नहीं
मैंने मुस्कराते हुए कहा , अब भीग जाए !!

तुमने कुछ देर ठहर कर कहा , मैं चलती हूँ   ...

समय फिर रुक  सा गया, 
मैंने देखा चाय के कप में ;
पेड़ के फूलो से पानी टपक रहा था ;
और बारिश का पानी  जमा  हो रहा  था .

मैंने कहा कि ,
नहीं .
अब मत जाओ ...

लेकिन तुमने मुझसे ज्यादा दुनिया देखी थी
और
मेरी प्रेम की दुनिया में तुम नहीं रह सकती थी .
क्योंकि साथ निभाना तुमने नहीं जाना था .

तुमने कहा ,
नहीं , अब बहुत देर हो चुकी  है
और .......तुम चली  गयी !

मैं बाहर  आ कर तुम्हे मोड़ तक देखते रहा 
मैं भीग  रहा  था जोरो से..
तुमने मुड़कर  देखा मुझे मोड़ पर  ;
और चली  गयी .

मैं बहुत देर तक वह खड़ा रहा ,
और बारिश के पानी में ;
मेरे आंसुओ को मिलते हुए देखता रहा

मैं मुड कर देखा ,
मोड पर अब कोई नहीं था
और ;
वो दो फूल झड गए थे .
चाय के कप में अब पूरी तरह से बारिश का पानी भर गया था ; 
और शायद ज़िन्दगी में भी !!!!




Sunday, July 17, 2011

मुझे यकीन है ….

मुझे यकीन है ….

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
अक्सर मेरे ख़तों के इंतजार में ,
अपने दरवाज़े पर खड़े होकर ;
अपने खुले हुए गेसुओ में ;
अपनी नाज़ुक उँगलियाँ ,
कुछ बैचेनी से अनजाने में लपेटते हुए
ख़त लाने वाले का इंतजार करती हो ....!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
अक्सर धुंधलाती हुई शामों में
धूल से भरी सडको पर .
बेसब्री से , भरी हुई आँखों में
आंसुओं को थामे , कुछ सिसकते हुए..
हर आते जाते हुए सायो में .
किसी अपने के साये का इंतजार करती हो ......!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
अक्सर मेरी आवाज सुनने को बैचेन रहती हो
दौड़ दौड़ कर ,एक यकीन के साथ
कुछ मेरी यादो के साथ
कुछ अपने मोहब्बत के सायों से लिपटे हुए
मदहोश सी , मेरी आवाज़ सुनने चली आती हो.....!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
रातों को जब सारा जहाँ सो जाये
तो, तुम तारो से बातें करती हो
कुछ अपने बारें में ,कुछ मेरे बारें में
कुछ गिले शिकवे , कुछ प्यार
ये सब कुछ ,मेरी नज़मो / ख़तों को पढ़ते हुए
मुझे याद करते हुए , क्यों तकियों को भिगोती हो.....!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
पर मुझे यकीन है कि
तुम मुझे प्यार करती हो……!!!!

Saturday, July 2, 2011

तस्वीर....!!!



THIS POEM TAKES YOU ALL TO A WORLD OF PURE LOVE ; WHERE YOU WILL TRAVEL ALONG WITH THE WRITER ON A TIMELESS JOURNEY.... ONE OF MY ALL TIME FAVORITE COMPOSITIONS ...................


तस्वीर

मैंने चाहा कि
तेरी तस्वीर बना लूँ इस दुनिया के लिए,
क्योंकि मुझमें तो है तू ,
हमेशा के लिए....

पर तस्वीर बनाने का साजो समान नही था मेरे पास.
फिर मैं ढुढ्ने निकला ;
वह सारा समान ,
मोहब्बत के बाज़ार में...

बहुत ढूंढा , पर कहीं नही मिला;
फिर किसी मोड़ पर किसी दरवेश ने कहा,
आगे है कुछ मोड़ ,तुम्हारी उम्र के ,
उन्हें पार कर लो....

वहाँ एक अंधे फकीर कि मोहब्बत की दूकान है;
वहाँ ,मुझे प्यार कर हर समान मिल जायेगा..

मैंने वो मोड़ पार किए ,सिर्फ़ तेरी यादों के सहारे !!

वहाँ वो अँधा फकीर खड़ा था ,
मोहब्बत का समान बेच रहा था..
मुझ जैसे, तुझ जैसे,
कई लोग थे वहाँ अपने अपने यादों के सलीबों और सायों के साथ....

लोग हर तरह के मौसम को सहते वहाँ खड़े थे...
शमशान के प्रेतों की तरह .......

उस फकीर की मरजी का इंतज़ार कर रहे थे....
फकीर बड़ा अलमस्त था...
खुदा का नेक बन्दा था...
अँधा था......

मैंने पूछा तो पता चला कि
मोहब्बत ने उसे अँधा कर दिया है !!
या अल्लाह ! क्या मोहब्बत इतनी बुरी होती है..
मैं भी किस दुनिया में भटक रहा था....

खैर ; जब मेरी बारी आई
तो ,
उस अंधे फकीर ने ,
तेरा नाम लिया ,और मुझे चौंका दिया ,
मुझसे कुछ नही लिया.. और
तस्वीर बनाने का साजो समान दिया...
सच... कैसे कैसे जादू होते है मोहब्बत के बाजारों में !!!!

मैं अपने सपनो के घर आया ..
तेरी तस्वीर बनाने की कोशिश की ,
पर खुदा जाने क्यों... तेरी तस्वीर न बन पाई...

कागज़ पर कागज़ ख़त्म होते गए ...
उम्र के साल दर साल गुजरते गये...
पूरी उम्र गुजर गई
पर
तेरी तस्वीर न बनी ,
उसे न बनना था ,इस दुनिया के लिए ....न बनी !!

जब मौत आई तो ,
मैंने कहा ,दो घड़ी रुक जा ;
ज़िन्दगी का एक आखरी कागज़ बचा है ॥उस पर मैं "उसकी" तस्वीर बना लूँ !

मौत ने हँसते हुए उस कागज़ पर ,
तेरा और मेरा नाम लिख दिया ;
और मुझे अपने आगोश में ले लिया .
उसने उस कागज़ को मेरे जनाजे पर रख दिया ,
और मुझे दुनियावालों ने फूंक दिया.
और फिर..
इस दुनिया से एक और मोहब्बत की रूह फना हो गई..