Thursday, December 31, 2009

आप सब को नए साल की शुभकामनाये !!!









दोस्तों

आप सब को नए साल की शुभकामनाये !!!
नया साल, आपकी ज़िन्दगी में ; बहुत सी खुशियाँ लेकर आये , मेरी दिल से यही दुआ है आप सभी के लिए .. और हाँ मेरे desk से कुछ छोटी छोटी बाते जो शायद आपके जीवन में कुछ काम आये .....


१. अपने आप में तथा अपने ईश्वर में विश्वास रखे !

२. आगाध आस्था , सम्पूर्ण विश्वास और अटूट प्रेम के साथ जीत की भावना भी आपके भीतर जागृत होवे..

३. आपको अपने आप से ही compete करना है और आपको जीत अपने आप पर ही [ अपनी कमियाँ etc . ] पर हासिल करनी होंगी ..

४. इस धरा के बेहतरीन मंत्र सिर्फ तीन है : दोस्ती , प्रेम, आदर !!!

५. खुश रहे , चुटकुले सुनाये , खूब हँसे ...इस planet को आपकी ख़ुशी की आवश्यकता है ..

६. और अंत में अपना १०० % देवे ...हमेशा .. चाहे वो देश हो , company हो , समाज हो , या घर हो ....अपना output आप हमेशा सर्वश्रेष्ट देने की कोशिश करे..

आपको फिर से नव वर्ष की ढेर सारी बधाई !!

आपका

विजय

+91 9849746500


1. My blog on shri shirdi saibaba : http://shrisaibabaofshirdi.blogspot.com/

2. My blog of photography : http://photographyofvijay.blogspot.com/

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Thursday, December 24, 2009

मेरा नया ब्लॉग : अध्यात्म, जीवन, दर्शन, चिंतन,धर्म और प्रेम पर

दोस्तों ,

नमस्कार, मैंने अध्यात्म,धर्म, जीवन, दर्शन, और चिंतन पर एक ब्लॉग बनाया है ,जो की मेरे अपने अनुभवों का निचोड़ है ,जो कुछ भी मैंने इस छोटी सी उम्र में देखा, जाना, सीखा, पढ़ा, समझा और प्राप्त किया , वही सब कुछ मैंने अपने लेखो के द्वारा इस ब्लॉग में आप सब से बांटना चाहता हूँ , ब्लॉग का नाम है अंतर्यात्रा.... मेरी आप सबसे विनंती है की ,समय निकल कर इस ब्लॉग पर मेरे लेखो को पदियेंगा . बहुत बहुत धन्यवाद. ईश्वर आप सबको सुख , संतोष, ख़ुशी और प्रेम दे . ब्लॉग का लिंक है : http://spiritualityofsoul.blogspot.com/

Monday, December 14, 2009

मेरा फोटोग्राफी ब्लॉग




मेरा फोटोग्राफी ब्लॉग

आदरणीय दोस्तों , मैंने अपना फोटोग्राफी ब्लॉग को update किया है ...आप से निवदन है की अगर समय हो तो जरुर मेरे द्वारा लिए गए photographs को देखे और अपनी अमूल्य राय देवे. .. ब्लॉग का लिंक है : http://photographyofvijay.blogspot.com/
धन्यवाद.
आपका
विजय

Sunday, December 6, 2009

आबार एशो [ আবার এশো ] [ फिर आना ]



आबार एशो [ আবার এশো ] [ फिर आना ]

सुबह का सूरज आज जब मुझे जगाने आया
तो मैंने देखा वो उदास था
मैंने पुछा तो बुझा बुझा सा वो कहने लगा ..
मुझसे मेरी रौशनी छीन ले गयी है ;
कोई तुम्हारी चाहने वाली ,
जिसके सदके मेरी किरणे
तुम पर नज़र करती थी !!!

रात को चाँद एक उदास बदली में जाकर छुप गया ;
तो मैंने तड़प कर उससे कहा ,
यार तेरी चांदनी तो दे दे मुझे ...
चाँद ने अपने आंसुओ को पोछते हुए कहा
मुझसे मेरी चांदनी छीन ले गयी है
कोई तुम्हारी चाहने वाली ,
जिसके सदके मेरी चांदनी
तुम पर छिटका करती थी ;

रातरानी के फूल चुपचाप सर झुकाए खड़े थे
मैंने उनसे कहा ,दोस्तों
मुझे तुम्हारी खुशबू चाहिए ,
उन्होंने गहरी सांस लेते हुए कहा
हमसे हमारी खुशबू छीन ले गयी है
कोई तुम्हारी चाहने वाली ,
जिसके सदके हमारी खुशबू
तुम पर बिखरा करती थी ;

घर भर में तुम्हे ढूंढता फिरता हूँ
कही तुम्हारा साया है ,
कही तुम्हारी मुस्कराहट
कहीं तुम्हारी हंसी है
कही तुम्हारी उदासी
और कहीं तुम्हारे खामोश आंसू

तुम क्या चली गयी
मेरी रूह मुझसे अलग हो गयी

यहाँ अब सिर्फ तुम्हारी यादे है
जिनके सहारे मेरी साँसे चल रही है ....

आ जाओ प्रिये
बस एक बार फिर आ जाओ
आबार एशो प्रिये
आबार एशो !!!!!

Saturday, December 5, 2009

मटमैला पानी – PART -I


दोस्तों ; ये कविता मैं दुनिया के सारे शराबियों को नज़र करता हूँ ..!!! " मटमैला पानी " शराब के जाम के लिए "कोड वर्ड" है . .. [वैसे शराब पीना बुरी बात है जी ]

मैं अपने सारे ब्लॉगर दोस्तों से ये अपील ,गुजारिश, निवेदन करूँगा की वो भी इस कविता में डुबकी लगाये और एक एक अंतरा जरुर लिखे ...कमेन्ट में....!!! मैं ये सारे अंतरे जोड़कर करीब एक महीने के बाद इस कविता का PART-II पेश करूँगा , जिसमे आप सभी के अंतरे शामिल करूँगा . मेरी ये गुजारिश मेरे गुरु श्री नीरज जी , मुफ्लिश जी , मनु जी , सुशील जी तथा अन्य सारे दोस्तों से है ..... , आईये , इस महफ़िल में अपने नाम का एक जाम जोडीये जरुर....अंतरे के रूप में .... ये एक नयी कोशिश है, मुझे लगता है की हम सब मिल कर एक नयी कविता के फॉर्म का जन्म देंगे ..

मटमैला पानी

सुन लो मेरी ये बात दिल लगा कर जानी
यारो में यार होता है मटमैला पानी !

नहीं किसी से भी इसकी दुश्मनी यारो
बस दोस्ती जन्मभर निभाए ये मटमैला पानी !!
सुन लो मेरी ये बात………….

कभी अपनों ने दिल दुखाया
कभी परायो ने दिल दुखाया
किस किस की बात करे ,सबने दिल दुखाया
पर जिसने हमेशा राहत दी , वो है मटमैला पानी
सुन लो मेरी ये बात……………

दुनिया के लाख झमेले है
इस को निपटाए या उसको निपटाए
दिन रात इसी में बीत जाते है
पर जिसने सारे झमेले निपटाए , वो है मटमैला पानी
सुन लो मेरी ये बात…………..

कौन हिन्दू, कौन मुस्लिम ,
कौन सिख और कौन है इसाई
पीकर जिसे बन जाते है सब हिन्दुस्तानी
वो है सबका प्यारा मटमैला पानी
सुन लो मेरी ये बात………………..

इश्क ने सताया , घर ने सताया
दुनिया ने सताया , दोस्त ने सताया ,
दुश्मन ने भी सताया ...जिसको जानी
वो बस भूल जाये सबकुछ पीकर मटमैला पानी
सुन लो मेरी ये बात……………..



Sunday, November 29, 2009

मेरा कुछ सामान


दोस्तों ,बहुत दिनों से कुछ उलझा हुआ था ज़िन्दगी की कशमकश में , और अब , जब लगने लगा की ,मुझमे और मेरी कविताओ में दूरी बढ़ते जा रही है ,तो आज कुछ लिखा ! इस छोटी सी नज़्म को आपकी महफ़िल में नज़र करता हूँ , और उम्मीद करता हूँ की ,हमेशा कि तरह ,आप सभी अपना प्यार और आशीर्वाद से मुझे नवाजेंगे !!!





मेरा कुछ सामान


कुछ दिन पहले मेरा कुछ सामान
मैंने तुम्हारे पास रख छोडा था !

वो पहली नज़र ..
जिससे तुम्हे मैंने देखा था ;
मैं अब तक तुम्हे देख रहा हूँ..

वो पहली बार तुम्हे छूना..
वो तुम्हारे नर्म लबो के अहसास आज भी
अक्सर मुझे रातों को जगा देते है ..

वो सारी रात चाँद तारो को देखना ..
वो सारी सारी रात बाते करना ....
मैं अब भी तुम्हे चाँद में ढूंढता हूँ

वो तुम्हारे काँधे के पार मेरा देखना...
वो तुम्हारा खुलकर मुस्कराना
तुम्हारी मुस्कान अब तक मेरा सहारा बनी हुई है

वो साथ साथ दुनिया को देखना ..
वो पानी में खेलना और गलियों में भटकना ...
तेरे साथ का साया अब तक मेरे साथ है

वो तुम्हारी आँखों की गहरयियो में झांकना ..
वो तुम्हारी गुनगुनाहट को सुनना ...
वो तुम्हे जानना ,तुम्हे पहचानना

वो तुम्हारे कदमो की आहट ..
वो मेरे हाथो का स्पर्श ....
वो हमारा मिलना और जुदा होना

वो मेरा बोलना , वो तुम्हारा सुनना ..
वो मौन में उतरती बाते
वो चुपचाप गहराती राते

वो कविता ....वो गीत ..
वो शब्द ,वो ख़त ,
तुम्हारे लिखे ख़त अब , मेरी साँसे बनी हुई है

वो ढलती हुई शाम ..
वो उगता हुआ सूरज
वो ज़िन्दगी का चुपचाप गुजरना

वो तुम्हारा आना ..
वो तुम्हारा जाना ...
वो ये ;
वो वो .............
जाने क्या क्या ....

इन सब के साथ ,

मेरे कुछ आंसू भी है जांना तुम्हारे पास......

तुम्हे कसम है हमारी मोहब्बत की
मेरा सामान कभी वापस न करना मुझे !!!


Wednesday, October 7, 2009

तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?



तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?


अचानक ही ये कैसे अहसास है
कुछ नाम दूं इसे
या फिर ;
अपने मौन के साथ जोड़ दूं इसे

किसी मौसम का नया रंग हो शायद
या फिर हो ज़िन्दगी की अनजानी आहट
एक सुबह हो ,सूरज का नया रूप लिये

पता नहीं …..
मेरी अभिव्यक्ति की ये नयी परिभाषा है

ये कैसे नये अहसास है
मौन के भी शब्द होतें है
क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....

पलाश की आग के संग ...
गुलमोहर के हो बहुत से रंग
और हो रजनीगंधा की गंध
जो छा रही है मन पर
और तन पर
तेरे नाम के संग …..

तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?

Monday, October 5, 2009

मुसाफ़िर --- मेरी 100 वी पोस्ट


दोस्तों , ये मेरी 100 वी पोस्ट है , इस मुकाम तक पहुँचने के लिए , आपके प्यार के लिए , आपकी हौसला - अफजाई के लिए , आपकी दोस्ती के लिए और आपके आर्शीवाद के लिए ; मैं आप सबका दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ , और आप सब का आभारी हूँ !! मैं विनंती करता हूँ कि , इसी तरह से आप सभी ; मुझ पर अपना प्यार और आर्शीवाद बनाये रखे ॥

दोस्तों , मुझे इस रचना की प्रेरणा, श्री राजेंद्र सिंह बेदी की उर्दू कहानी " टर्मिनस " से मिली ..... हमेशा की तरह दिल से लिखा है ,उम्मीद है कि आपको अच्छी लगेंगी !!

……………..हकीक़त तो यही है की हम सब ज़िन्दगी की एक बड़ी सी रेलगाडी में सवार है और अपने अपने स्टेशन की राह देख रहे है ...!!!




मुसाफ़िर

इंजिन की तेज सीटी ने
मुझे नींद से उठा दिया ...
मैंने उस इंजिन को कोसा
क्योकि मैं एक सपना देख रहा था
उसका सपना !!!

ट्रेन , पता नहीं किस स्टेशन से गुजर रही थी
मैंने अपने थके हुए बुढे शरीर को ;
खिड़की वाली सीट पर संभाला ;
मुझे ट्रेन की खिड़की से बाहर देखना अच्छा लगता था !

बड़े ध्यान से मैंने अपनी गठरी को टटोला ,
वक़्त ने उस पर धुल के रंगों को ओढा दिया था ....
उसमे ज्यादातर जगह ;
मेरे अपने दुःख और तन्हाई ने घेर रखी थी
और कुछ अपनी - परायी यादे भी थी ;
और हाँ एक फटी सी तस्वीर भी तो थी ;
जो उसकी तस्वीर थी !!!

बड़ी देर से मैं इस ट्रेन में बैठा था
सफ़र था की कट ही नहीं रहा था
ज़िन्दगी की बीती बातो ने
कुछ इस कदर उदास कर दिया था की
समझ ही नहीं पा रहा था की मैं अब कहाँ जाऊं..

सामने बैठा एक आदमी ने पुछा
“बाबा , कहाँ जाना है ?”
बेख्याली में मेरे होंठो ने कहा ;
“होशियारपुर !!!”

कुछ शहर ज़िन्दगी भर के लिए;
मन पर छप जाते है , अपने हो जाते है ..!
होशियारपुर भी कुछ ऐसा ही शहर था
ये मेरा शहर नहीं था , ये उसका शहर था;
क्योंकि, यही पहली बार मिला था मैं उससे !

आदमी हंस कर बोला ,
“बाबा , आप तो मेरे शहर को हो ...
मैं भी होशियारपुर का बन्दा हूँ”

“बाबा, वहां कौन है आपका ?”
आदमी के इस सवाल ने
मुझे फिर इसी ट्रेन में ला दिया
जिसके सफ़र ने मुझे बहुत थका दिया था

मैंने कहा .. “कोई है अपना
....जिससे मिले बरसो बीत गए ...”
उसी से मिलने जा रहा हूँ ..
बहुत बरस पहले अलग हुआ था उससे
तब उसने कहा था की कुछ बन के दिखा
तो तेरे संग ब्याह करूँ… तेरे घर का चूल्हा जलाऊं !!

“मैंने कुछ बनने के लिए शहर छोड़ दिया
पर अब तक ……. कुछ बन नहीं पाया
बस; सांस छुटने के पहले..
एक आखरी बार उससे मिलना चाहता हूँ !!!”

आदमी एक दर्द को चेहरे पर लेकर चुप हो गया

मैंने खिड़की से बाहर झाँका ...
पेड़, पर्वत, पानी से भरे गड्डे,
नदी, नाले, तालाब ; झोपडियां ,
आदमी , औरत , बच्चे
सब के सब पीछे छूटे जा रहे थे

भागती हुई दुनिया ......भागती हुई ज़िन्दगी
और भागती हुई ट्रेन के साथ मेरी यादे...

किस कदर एक एक स्टेशन छुटे जा रहे थे
जैसे उम्र के पड़ाव पीछे छुट गए थे
कितने दोस्त और रिश्तेदार मिले ,
जो कुछ देर साथ चले और फिर बिछड गए
लेकिन वो कभी भी मुझसे अलग नहीं हुई..
अपनी यादो के साथ वो मेरे संग थी
क्योंकि, उसने कहा था ;
“तेरा इन्तजार करुँगी करतारे
जल्दी ही आना” ;

आदमी बोला , “फगवारा गया है अभी
जल्दी ही जालंधर आयेगा ,
फिर आपका होशियारपुर !!!”

मेरा होशियारपुर ..!!!
मैंने एक आह भरी
हाँ , मेरा हो सकता था ये शहर ..
लेकिन क्या शहर कभी किसी के हो सकते है
नहीं , पर बन्दे जरुर शहर के हो सकते है
जैसे वो थी ......इस शहर की
मैंने अपने आप से मुस्कराते हुए कहा
“अगर वो न होती तो मेरे लिए ये शहर ही नहीं होता !”

आदमी को जवाब देने के लिए;
जो ,मैंने कहीं पढ़ा था ; कह दिया कि..
“दुनिया एक मुसाफ़िरखाना है ,
अपनी अपनी बोलियों बोलकर सब उड़ जायेंगे !!!”

जालन्धर पर गाडी बड़ी देर रुकी रही ,
आदमी ने मेरे लिए पानी और चाय लाया
रिश्ते कब ,कहाँ और कैसे बन जाते है ,
मैं आज तक नहीं समझ पाया

जैसे ही ट्रेन चल पढ़ी ,
अब मेरी आँखों में चमक आ गयी थी
मेरा स्टेशन जो आने वाला था

आदमी ने धीरे से , मुझसे पुछा
“बहुत प्यार करते थे उससे”

मैंने कहीं बहुत दूर ……बहुत बरस पहले ;
डूबते हुए सूरज के साथ ,
झिलमिल तारो के साथ ,
छिटकती चांदनी के साथ ,
गिद्धा की थाप के साथ,
सरसों के लहलहाते खेतो में झाँककर कहा
“हाँ .. मैं उससे बहुत प्यार करता था..
वो बहुत खूबसूरत थी …..
सरसों के खेतो में उड़ती हुई उसकी चुनरी
और उसका खिलखिलाकर हँसना ...
बैशाखी की रात में उसने वादा किया था
की वो मेरा इन्तजार करेंगी
मुझे यकीन है कि ;
वो मेरा इन्तजार कर रही होंगी अब तक ;
बड़े अकेले जीवन काटा है मैंने
अब उसके साथ ही जीना है ;
और उसके साथ ही मरना है”

नसराला स्टेशन पीछे छुटा
तो , मैंने एक गहरी सांस ली
और मैंने अपनी गठरी संभाली
एक बार उसकी तस्वीर को देखा

अचानक आदमी ने झुककर ;
तस्वीर को बड़े गौर से देखा
फिर मेरी तरफ देखा
और फिर मुझसे धीरे से कहा ,
“इसका नाम संतो था क्या ...”

मैंने ख़ुशी से उससे पुछा
“तुम जानते हो उसे” ,
आदमी ने तस्वीर देख कर कहा
“ये ……...............................................
……….ये तो कई बरस पहले ही पागल होकर मर गयी
किसी करतारे के प्यार में पागल थी..
हमारे मोहल्ले में ही रहती थी .................”

फिर मुझे कुछ सुनाई नहीं पड़ा
ट्रेन धीमे हो रही थी ….
कोई स्टेशन आ रहा था शायद..
मुझे कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था
शायद बहते हुए आंसू इसके कारण थे
गला रुंध गया था …सांस अटकने लगी थी
धीरे धीरे सिसकते हुए ट्रेन रुक गयी

एक दर्द सा दिल में आया
फिर मेरी आँख बंद हो गयी
जब आँख खुली तो देखा ;
डिब्बे के दरवाजे पर संतो खड़ी थी
मुस्कराते हुए मुझसे कहा
चल करतारे , चल ,
वाहे गुरु के घर चलते है !!
मैं उठ कर संतो का हाथ पकड़ कर
वाहे गुरु के घर की ओर चल पड़ा

पीछे मुड़कर देखा तो मैं गिर पड़ा था
और वो आदमी मुझे उठा रहा था

मेरी गठरी खुल गयी थी
और मेरा हाथ
संतो की तस्वीर पर था

डिब्बे के बाहर देखा ;
तो स्टेशन का नाम था …..
……..होशियारपुर !!!

मेरा स्टेशन आ गया था !!!

Wednesday, September 30, 2009

भारतीय कॉमिक्स पर आधारित मेरा नया ब्लॉग ....





दोस्तों , मैंने एक नया ब्लॉग बनाया है जो की भारतीय कॉमिक्स पर आधारित है ॥ हम सबमे एक बच्चा छुपा होता है , मुझमे भी है who refuses to grow up...... मैं आज भी कॉमिक्स पढता हूँ और पूरी तरह से दीवाना हूँ कॉमिक्स का .......बचपन से मैंने इंद्रजाल कॉमिक्स, मधुमुस्कान , दीवाना ,लोटपोट इत्यादि कॉमिक्स पढ़ी और अब तक उन्हें collect कर रहा हूँ ॥ मैंने इस ब्लॉग में भारतीय कॉमिक्स के चरित्रों को खुद skteching करके बनाया है । आपको बहुत ख़ुशी होंगी और आपके बचपन की यादें ताजा हो जाएँगी ॥ मुझे जब भी समय मिलेंगा ,मैं इन चरित्रों को बना कर आपके सामने हाज़िर करूँगा । करीब 100 भारतीय कॉमिक चरित्र है ,जिन्हें मैं इस ब्लॉग में लाने की कोशिश करूँगा .. आप सब से निवेदन है की अपने बचपन की मस्त यादो को ताज़ा करे और इस लिंक पर click करे..

http://comicsofindia.blogspot.com/

धन्यवाद...
आपका
विजय

Friday, September 18, 2009

मृत्यु




ये कैसी अनजानी सी आहट आई है ;
मेरे आसपास .....
ये कौन नितांत अजनबी आया है मेरे द्वारे ...
मुझसे मिलने,
मेरे जीवन की , इस सूनी संध्या में ;
ये कौन आया है ….

अरे ..तुम हो मित्र ;
मैं तो तुम्हे भूल ही गया था,
जीवन की आपाधापी में !!!

आओ प्रिय ,
आओ !!!
मेरे ह्रदय के द्वार पधारो,
मेरी मृत्यु...
आओ स्वागत है तुम्हारा !!!

लेकिन ;
मैं तुम्हे बताना चाहूँगा कि,
मैंने कभी प्रतीक्षा नहीं की तुम्हारी ;
न ही कभी तुम्हे देखना चाहा है !

लेकिन सच तो ये है कि ,
तुम्हारे आलिंगन से मधुर कुछ नहीं
तुम्हारे आगोश के जेरे-साया ही ;
ये ज़िन्दगी तमाम होती है .....

मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ ,
कि ;
तुम मुझे बंधन मुक्त करने चले आये ;

यहाँ …. कौन अपना ,कौन पराया ,
इन्ही सच्चे-झूठे रिश्तो ,
की भीड़ में,
मैं हमेशा अपनी परछाई खोजता था !

साँसे कब जीवन निभाने में बीत गयी,
पता ही न चला ;
अब तुम सामने हो;
तो लगता है कि,
मैंने तो जीवन को जाना ही नहीं…..

पर हाँ , मैं शायद खुश हूँ ,
कि; मैंने अपने जीवन में सबको स्थान दिया !
सारे नाते ,रिश्ते, दोस्ती, प्रेम….
सब कुछ निभाया मैंने …..
यहाँ तक कि ;
कभी कभी ईश्वर को भी पूजा मैंने ;
पर तुम ही बताओ मित्र ,
क्या उन सबने भी मुझे स्थान दिया है !!!

पर ,
अब सब कुछ भूल जाओ प्रिये,
आओ मुझे गले लगाओ ;
मैं शांत होना चाहता हूँ !
ज़िन्दगी ने थका दिया है मुझे;
तुम्हारी गोद में अंतिम विश्राम तो कर लूं !

तुम तो सब से ही प्रेम करते हो,
मुझसे भी कर लो ;
हाँ……मेरी मृत्यु
मेरा आलिंगन कर लो !!!

बस एक बार तुझसे मिल जाऊं ...
फिर मैं भी इतिहास के पन्नो में ;
नाम और तारीख बन जाऊँगा !!
फिर
ज़माना , अक्सर कहा करेंगा कि
वो भला आदमी था ,
पर उसे जीना नहीं आया ..... !!!

कितने ही स्वपन अधूरे से रह गए है ;
कितने ही शब्दों को ,
मैंने कविता का रूप नहीं दिया है ;
कितने ही चित्रों में ,
मैंने रंग भरे ही नहीं ;
कितने ही दृश्य है ,
जिन्हें मैंने देखा ही नहीं ;
सच तो ये है कि ,
अब लग रहा है कि मैंने जीवन जिया ही नहीं

पर स्वप्न कभी भी तो पूरे नहीं हो पाते है
हाँ एक स्वपन ,
जो मैंने ज़िन्दगी भर जिया है ;
इंसानियत का ख्वाब ;
उसे मैं छोडे जा रहा हूँ ...

मैं अपना वो स्वप्न इस धरा को देता हूँ......



Thursday, September 10, 2009

प्रेम कथा


बहुत समय पहले की बात है
जब देवताओ ने सोचा की
एक प्रेम कथा बनाई जाए ;
उन्होंने तुम्हे बनाया ,
उन्होंने मुझे बनाया ,
और एक जन्म बनाया ;

पर शायद कुछ भूल हो गई ....
कुछ समय का रथ आगे निकल गया,
इस जन्म के लिए एक जन्म बीत गया !!!

जाने -अनजाने में जब हम बने तो
तुम किसी और की हो चुकी थी
मैं किसी और हो चुका था
तुम्हारा जीवन बन रहा था
किसी और के संग फेरे लेते हुए
मेरा जीवन बन रहा था
किसी और के संग मन्त्र पढ़ते हुए....

देवताओ ने हमें बनाया
और जुदा कर दिया
शायद देवता पत्थर के होतें है
शायद देवताओ को एक नए दर्द को जन्म देना था
शायद तुम्हारे मन से
शायद मेरे मन से
पता नही ,
पर देवताओ की बातें देवता ही जाने
हम बने ..
प्यार का जन्म हुआ...
पर हमारे बन्धनों ने उस जन्म को पहली साँस में ही
मृत्यु का आलिंगन दे दिया
और मैं अपनी बात कह न सका ...

समय बीता और जीवन बीता
हमारे बंधन पिघलने लगे
शायद नए बन्धनों के जन्म के लिए
या फिर एक मृत्यु के लिए
हमारी मृत्यु के लिए !

मैंने अब तुमसे अपनी बात की है
देवता शायद इसी दिन का इन्तजार कर रहे थे
वो बड़ी अनोखी रात थी
सारी दुनिया सोयी हुई थी

अचानक चाँद को बादलों ने
अपनी आगोश में ले लिया था
जुगुनू किसी विस्फोट के अंदेशे में कहीं छुप गए थे
आकाश को चूमते हुए पर्वत सिकुड़ गए थे
झींगूरो की कर्कश आवाज शांत थी

सब तरफ़ अजीब सी शान्ति थी
शायद मृत्यु की शान्ति थी
लगता था सब मर चुके है
चाँद ,तारे, पेड़ ,पर्वत और
सारे इंसान
हाँ !
सिर्फ़ हम जिंदा थे
तुम और मैं ......

हम दोनों जल रहे थे
जब कांपती हुई आवाज में ,
तुम्हारा हाथ; मैंने अपने धड़कते हुए दिल पर रखकर
तुमसे , मैंने अपनी बात कही
वो अनजानी सी पुरानी बात कही
उस बात को कहने में
सच कितना समय बीत गया था
यूँ लग रहा था की कई जन्म बीत गए थे
मैंने जब तुमसे वो बात कही
तो शायद समय रुक गया था
हवा ठहर गई थी
हमारी साँसे भी ठहर गई थी
मैंने तुमको तुमसे माँगा
इस जन्म के लिए
तुमने देवताओं को देखा
उन्हें देखकर आंसू बहाए
और प्रार्थना की
कि ;
समय को पीछे ले जाया जाएँ
पर देवता तो पत्थर के बने होतें है

उन्होंने मना कर दिया
न ही उन्होंने हमें ज़िन्दगी दी और न ही दी , हमें एक मौत
जो सब कुछ शांत कर दे
उन्होंने दिए हमें अपने अपने बंधन
जिनके साथ हमने जीना है
इस जन्म के लिए..... उस मृत्यु के लिए

उस मृत्यु के लिए ,जो हमें जुदा कर दे एक जन्म के लिए
जब हम एक हो
जो हमें मिला दे हमेशा के लिए
हम हार गए ..इस जन्म के लिए
और शायद जीत गए ,अगले जन्म के लिए
शायद ..पता नही ;

जन्म और मृत्यु को किसने समझा है
देवताओ कि बातें देवता ही जाने
हम तो इंसान है
मन कि बातें मन के शहर कि गलियों में भटकने दो
यही शायद वक्त का फ़ैसला है
पता नही ...पर शायद ,
प्रेमकथा
इसे ही कहते है
शायद देवता भी यही चाहते है .......

एक अधूरी [ पूर्ण ] कविता

घर परिवार अब कहाँ रह गए है , अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है अब तो सिर्फ \बस सिर्फ...