Saturday, September 2, 2017

“ क्षितिज ”



मिलना मुझे तुम उस क्षितिज पर
जहाँ सूरज डूब रहा हो लाल रंग में
जहाँ नीली नदी बह रही हो चुपचाप
और मैं आऊँ निशिगंधा के सफ़ेद खुशबु के साथ
और तुम पहने रहना एक सफेद साड़ी
जो रात को सुबह बना दे इस ज़िन्दगी भर के लिए
मैं आऊंगा जरूर ।
तुम बस बता दो वो क्षितिज है कहाँ प्रिय ।
© विजय


5 comments:

  1. Hey keep posting such good and meaningful articles.

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  2. Very very nice shayari thanks for sharing I loved it
    hindi shayari

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  3. मेरे चेहरे पर ख़ुशी देखने वाले कभी इन आँखों में आंसू भी देखे होत
    हम हंसकर ग़म छुपाते है अपना वरना ग़म तो हमें भी बहुत है ।

    https://shaayridilse.blogspot.com/

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