Saturday, May 22, 2010

मेरा होना और न होना ....



दोस्तों ; ज़िन्दगी की राह में कुछ ऐसे पल आते है ,जब सबकुछ छोड़कर कहीं चले जाने का मन करता है , मन बुरी तरह व्यथित होता है और फिर मन -मंथन के एक निरर्थक प्रयास में से कुछ सार्थक सा जन्म लेता है ... बीते दिनों कुछ ऐसा ही मन-मंथन से मैं गुजरा और फिर .....अमृत की तरह मेरी ये कविता आपके सामने प्रस्तुत है ... आप सब का जीवन शुभमंगलमय हो ..यही उस ईश्वर से कामना है , और मेरी मन से प्रार्थना है ...!!! अस्तु !!!!




मेरा होना और न होना ....


उन्मादित एकांत के विराट क्षण ;
जब बिना रुके दस्तक देते है ..
आत्मा के निर्मोही द्वार पर ...
तो भीतर बैठा हुआ वह
परमपूज्य परमेश्वर अपने खोलता है नेत्र !!!

तब धरा के विषाद और वैराग्य से ही
जन्मता है समाधि का पतितपावन सूत्र ....!!!

प्रभु का पुण्य आशीर्वाद हो
तब ही स्वंय को ये ज्ञान होता है की
मेरा होना और न होना....
सिर्फ शुन्य की प्रतिध्वनि ही है....!!!

मन-मंथन की दुःख से भरी हुई
व्यथा से जन्मता है हलाहल ही हमेशा
ऐसा तो नहीं है ...
प्रभु ,अमृत की भी
वर्षा करते है कभी कभी ...
तब प्रतीत होता है ये की
मेरा न होना ही सत्य है ....!!

अनहद की अजेय गूँज से ह्रदय होता है
जब कम्पित और द्रवित ;
तब ही प्रभु की प्रतिच्छाया मन में उभरती है
और मेरे होने का अनुभव होता है !!!

अंतिम आनंदमयी सत्य तो यही है की ;
मैं ही रथ हूँ ,
मैं ही अर्जुन हूँ ,
और मैं ही कृष्ण .....!!
जीवन के महासंग्राम में ;
मैं ही अकेला हूँ और मैं ही पूर्ण हूँ
मैं ही कर्म हूँ और मैं ही फल हूँ
मैं ही शरीर और मैं ही आत्मा ..
मैं ही विजय हूँ और मैं ही पराजय ; 
मैं ही जीवन हूँ और मैं ही मृत्यु हूँ

प्रभु मेरे ;
किंचित अपने ह्रदय से
आशीर्वाद की एक बूँद मेरे ह्रदय में
प्रवेश करा दे !!!
तुम्हारे ही सहारे ही ;
मैं अब ये जीवन का भवसागर पार करूँगा ...!!!

प्रभु मेरे ,
तुम्हारा ही रूप बनू ;
तुम्हारा ही भाव बनू ;
तुम्हारा ही जीवन बनू ;
तुम्हारा ही नाम बनू ;
जीवन के अंतिम क्षणों में तुम ही बन सकू
बस इसी एक आशीर्वाद की परम कामना है ..
तब ही मेरा होना और मेरा न होना सिद्ध होंगा ..
प्रणाम...


 

Friday, May 14, 2010

अलविदा

सोचता हूँ 
जिन लम्हों को ;
हमने एक दूसरे के नाम किया है
शायद वही जिंदगी थी !

भले ही वो ख्यालों में हो ,
या फिर अनजान ख्वाबो में ..
या यूँ ही कभी बातें करते हुए ..
या फिर अपने अपने अक्स को ;
एक दूजे में देखते हुए हो ....

पर कुछ पल जो तुने मेरे नाम किये थे...
उनके लिए मैं तेरा शुक्रगुजार हूँ !!

उन्ही लम्हों को ;
मैं अपने वीरान सीने में रख ;
मैं ;
तुझसे ,
अलविदा कहता हूँ ......!!!

अलविदा !!!!!!

Sunday, May 9, 2010

मां

दोस्तों , करीब २ साल पहले मैंने ये कविता लिखी थी , आज mother's day पर फिर से ये कविता ब्लॉग पर दे रहा हूं . मेरी माँ नहीं है और मुझे हमेशा ही माँ की जरुरत  रही है .. ... मैंने ईश्वर को नहीं देखा  ,लेकिन माँ को देखा है .. और मुझे लगता है की माँ ही ईश्वर का सच्चा स्वरुप है .. मेरी ये कविता दुनिया के सारी माताओ को समर्पित है .......मुझे ये लगता है की हर इंसान मूलभूत रूप से अपनी माँ का ही साया होता है ,ज़िन्दगी की राह पर... माँ शब्द ही जादू से भरा है .. इतनी राहत देने वाला और शांत करने वाला दूसरा शब्द कोई और नहीं है ... माँ .तुझे  प्रणाम !!!

मां

आज गाँव से एक तार आया है !
लिखा है कि ,
माँ गुजर गई........!!

इन तीन शब्दों ने मेरे अंधे कदमो की ,
दौड़ को रोक लिया है !

और मैं इस बड़े से शहर में
अपने छोटे से घर की
खिड़की से बाहर झाँक रहा हूँ
और सोच रहा हूँ ...
मैंने अपनी ही दुनिया में जिलावतन हो गया हूँ ....!!!

ये वही कदमो की दौड़ थी ,
जिन्होंने मेरे गाँव को छोड़कर
शहर की भीड़ में खो जाने की शुरुवात की ...

बड़े बरसो की बात है ..
माँ ने बहुत रोका था ..
कहा था मत जईयो शहर मा
मैं कैसे रहूंगी तेरे बिना ..
पर मैं नही माना ..

रात को चुल्हे से रोटी उतार कर माँ
अपने आँसुओं की बूंदों से बचाकर
मुझे देती जाती थी ,
और रोती जाती थी.....

मुझे याद नही कि
किसी और ने मुझे
मेरी माँ जैसा खाना खिलाया हो...

मैं गाँव छोड़कर यहाँ आ गया
किसी पराई दुनिया में खो गया.
कौन अपना , कौन पराया
किसी को जान न पाया .

माँ की चिट्ठियाँ आती रही
मैं अपनी दुनिया में गहरे डूबता ही रहा..

मुझे इस दौड़ में
कभी भी , मुझे मेरे इस शहर में ...
न तो मेरे गाँव की नहर मिली
न तो कोई मेरे इंतज़ार में रोता मिला
न किसी ने माँ की तरह कभी खाना खिलाया
न किसी को कभी मेरी कोई परवाह नही हुई.....

शहर की भीड़ में , अक्सर मैं अपने आप को ही ढूंढता हूँ
किसी अपने की तस्वीर की झलक ढूंढता हूँ
और रातों को , जब हर किसी की तलाश ख़तम होती है
तो अपनी माँ के लिए जार जार रोता हूँ ....

अक्सर जब रातों को अकेला सोता था
तब माँ की गोद याद आती थी ..
मेरे आंसू मुझसे कहते थे कि
वापस चल अपने गाँव में
अपनी मां कि गोद में ...

पर मैं अपने अंधे क़दमों की दौड़
को न रोक पाया ...

आज , मैं तनहा हो चुका हूँ
पूरी तरह से..

कोई नही , अब मुझे
कोई चिट्टी लिखने वाला
कोई नही , अब मुझे
प्यार से बुलाने वाला
कोई नही , अब मुझे
अपने हाथों से खाना खिलाने वाला..

मेरी मां क्या मर गई...
मुझे लगा मेरा पूरा गाँव मर गया....
मेरा हर कोई मर गया ..
मैं ही मर गया .....

इतनी बड़ी दुनिया में ; मैं जिलावतन हो गया !!!!!

Thursday, April 8, 2010

मोहब्बत




मोहब्बत

कल तुझे डूबते हुए सुर्ख सूरज के साये में
फिर एक बार देखा ...
रात , बड़ी देर तक तेरा साया मेरे साथ ही था ..

एक ख्वाब तेरा चेहरा लिए  ;खुदा के घर से
दबे पाँव मेरी नींद की आगोश में सिमट आया ...
और रात की गहराती परछाईयो  ने ;
तुझे और मुझे ;
अपने इश्क़ की बाहों में समेट लिया ...

सुबह देखा तो तेरी हथेली में मेरा नाम खुदा हुआ था ..
मेरे जिस्म में तेरे अहसास भरे हुए थे ...

बादलो से भरे आसमान से खुदा ने झाँका और
हमें कुछ मोती दिए मोहब्बत की सौगात में ....

कुछ तुमने अपने भीतर समा लिया
कुछ मेरे पलकों के किनारों  पर ;
आंसू बन कर टिक गए ...

खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
मोहब्बत के नाम पर ...
उसे अब ताउम्र एक ही ओक  में पीना है ;
जिसमे एक हथेली तेरी हो
और एक हथेली मेरी हो .....

आओ इस अहसास को जी ले ,
जिसे मोहब्बत कहते है .....



Friday, February 26, 2010

याद

कल अचानक ही एक याद ने रास्ता रोक लिया ;
कहने लगी ...मुझे भूल गए ? कैसे ?
मैं तो तुम्हारी सबसे बड़ी निधि हूँ मेरे दोस्त !!!

मैंने देखा तो उस याद पर वक़्त की धुल और दुनिया के जाले ,
दोनों ने अपनी शिकस्त जमाई हुई थी ;
मैंने अपने आंसुओ से उस याद को साफ़ किया तो देखा की ;
तुम थी उस याद में !!!

मेरे साथ , एक अजनबी शहर में ; मेरे बांहों में ;
कुल जहान की खुशियाँ समेटे हुए ;

और भी कुछ था , देखा तो एक मौन था ,
कुछ आंसू थे , उखड़ी हुई साँसे थी ;
मेरा नाम था और सुनो जांना , तुम्हारा भी नाम था ......

हम मिले और जुदा हो गए ....
शायद फिर मिलने के लिए ....
शायद फिर जुदा होने के लिए ....

ज़िन्दगी की परिभाषा ;
जैसे हम सोचते है .....वैसी नहीं है .......

प्रेम बलिदान मांगता है और हम दे रहे है .....

कितनी बातें थी ..कितनी यादें थी ....
मैं निशब्द हूँ और मेरी आँखे ही सब कुछ कह रही है ....
बहुत कुछ ..शब्दों से परे ...

मौन के काल-पट पर ,आंसुओं से लिखते हुए ..
सुनो जांना , क्या तुम्हारे भी आंसू बह रहे है .....


Saturday, February 20, 2010

मेन इन यूनिफ़ॉर्म // MEN IN UNIFORM

दोस्तों , बहुत दिनों से कुछ लिखना चाहता था ,आर्मी पर !!!. आज मन आया तो लिख रहा हूं , ORGINALLY तो मैं कविताये ही लिखता हूं ,लेकिन इस बार एक छोटी सी कहानी लिखने का प्रयास किया है ... उम्मीद करता हूँ की  आप लोगो को पसंद आएँगी ...

दोस्तों , मैं फौजी ही बनना चाहता था , पर कहते है न , बहुत कम इंसान वो होते है , जो वही बन जाते है , जो वो बनना चाहते है ... मैं फौजी तो नहीं बना , लेकिन हर फौजी में मैं अपना COUNTER XEROX देखता हूं ... और मैं अपने देश के सारे फौजियों से बहुत प्यार करता हूं ... विविध भारती पर फौजी भाईयो के लिए जयमाला प्रोग्राम सुनने से लेकर कारगिल war के वक़्त ,अपने ऑफिस में सबकी एक महीने की SALARY COLLECT करने से लेकर, फौजियों की मौत पर चुपचाप रोने से लेकर , सुबह मेरे AREA में [ SAINIKPURI IN HYDERABAD ] फौजियों के साथ कदम मिला कर कवायद करने तक और उन्हें हंसकर सर की जुम्बिश से उन्हें सलाम करना , और मेरे बच्चो को सिखाना की सारे फौजियों को सलाम किया करो , उन्हें प्यार करो  और उनका आदर करो .....लिस्ट लम्बी है ,लेकिन मेरा प्यार मेरे देश के फौजियों के लिए अनंत .... मैं इस पोस्ट के जरिये , अपने देश के फौजियों को सलाम करता हूं ....जिनके लिए फौज में काम करना सिर्फ एक "JOB" नहीं है .....

मेरी ये पोस्ट मेरे दोस्त श्री गौतम राजरिशी और तमाम फौजी भाइयो को समर्पित है ....
-----------------------------------------
PART ONE
---------------------------------------

धाँय ....धाँय ....धाँय .....

तीन गोलियां मुझे लगी ,ठीक पेट के ऊपर और मैं एक झटके से गिरा....गोली के IMPACT और जमीन की ऊंची -नीची जगह के घेरो ने मुझे तेजी से वहां पहुचाया , जिसे NO MAN'S LAND कहते है ... मैं दर्द के मारे कराह उठा.. पेट पर हाथ रखा तो देखा भल  भल  करके खून आ रहा था .. अपना ही खून देखना ... मेरी आँखे मुंदने लगी ... कोई चिल्लाया , मेजर , WE ARE TAKING YOU TO HOSPITAL.....देखा तो मेरा दोस्त था ...मेरे पास आकर बोला " चल साले , यहाँ क्यों मर रहा है , हॉस्पिटल में मर "... मैंने हंसने की कोशिश की ,उसकी आँखों से आंसू गिरने लगे मेरे चहरे पर....

मेरी आँखे बंद हो गयी तो कई IMAGES मेरे जेहन में आने लगे , मैं मुस्करा उठा, कही पढ़ा था की मरने के ठीक १५ मिनट पहले सारी ज़िन्दगी याद आ जाती है ... मैंने AMBULANCE की खिड़की से बाहर  देखा , NO MAN'S LAND पीछे छूट रहा था .. ...ये भी अजीब जगह है यार , मैंने मन ही मन कहा ... दुनिया में सारी लड़ाई , सिर्फ और सिर्फ LAND के लिए है और यहाँ देखो तो कहते है NO MAN'S LAND......

कोई और IMAGE सामने आ रही थी , देखा तो , माँ की थी , एक हाथ में मेरा चेहरा थामकर दुसरे हाथ से मुझे खिला रही थी और बार बार कह रही थी की मेरा राजा बेटा सिपाही बनेंगा ....मुझे जोरो से दर्द होने लगा .......NEXT IMAGE मेरे स्कूल की थी , जहाँ १५ अगस्त को मैं गा रहा था , नन्हा मुन्हा राही हूँ , देश का सिपाही हूँ .......स्कूल का HEADMASTER ने मेरे सर पर हाथ फेरा ...मैंने माँ को देखा वो अपने आंसू पोंछ रही थी .....मेरे पिताजी भी फौज में थे .....ज़िन्दगी का विडियो बहुत ज्यादा FAST FORWARD हुआ अगली IMAGE में सिर्फ WAR MOVIES थी जिन्होंने मेरे खून में और ज्यादा जलजला पैदा किया ....

NEXT IMAGE में एक लड़की थी जिसके बारे में मैं अक्सर सोचता था...वो मुझे इंजिनियर के रूप में देखना चाहती थी , मैं आर्मी ऑफिसर बनना चाहता था .. एक उलटी सी आई , जिसने बहुत सा खून मेरे जिस्म से निकाला , मेरा दोस्त ने मेरा हाथ थपथपाया .."कुछ नहीं होंगा साले "....अगली IMAGE में उसकी चिट्टियां और कुछ फूल जो सूख गए थे ,किताबो में रखे रखे ..उसे वापस करते हुए मैंने NDA की ओर चल पड़ा ...

NEXT IMAGE में हम सारे दोस्त ENEMY AT THE GATES की कल्पना अपने देश की सरहद पर कर रहे थे ....क्या जज्बा था यारो में , हमारे लिए देश ही पहला GOAL था , देश ही आखरी GOAL था ......और , मैं आपको बताऊँ   , WE ALL WERE WAITING FOR OUR ENEMIES AT THE GATE .........

अगली IMAGE में मेरे माँ के आँखों में आंसू थे गर्व के ; तीन साल के बाद की PASSING PARADE में वो मेरे साथ थी और मैं उसके साथ था  . हमने एक साथ आसमान को देखकर कहा ....हमने आपका सपना साकार किया ........अगली IMAGE एक तार का आना था , जिसमे मेरी माँ के गुजरने की खबर थी .....मेरी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा PILLAR गिर गया था ... मुझे फिर उलटी आई .....मेरा दोस्त के आंसू सूख गए थे , मुझे पकड़कर कहा, "साले तेरे पीछे मैं भी आ रहा हूँ .....तू साले , नरक में अकेले मजे लेंगा..ऐसा मैं होने नहीं दूंगा" ......मैंने मुस्कराने की कोशिश की ...

सबसे प्यारी IMAGE  आई ..मेरी बेटी ख़ुशी की ......उसे मेरी फौज की बाते बहुत अच्छी लगती थी ....मेरी छुट्टियों   का उसे और मुझे बेताबी से इन्तजार रहता था ... मेरी पत्नी की IMAGE जो थी वो हमेशा सूखी आँखों से मुझे विदा करने की थी .......उसे डर लगता था की मैं .....मुझे कुछ हो जायेंगा .... इस बार उसका डर सच हो गया था ... मेरी बेटी की बाते ...कितनी सारी बाते ....मेरी आँखों में पहली बार आंसू आये ... मुझे रोना आया ..मैंने आँखे खोलकर दोस्त से कहा ..यार , ख़ुशी .......,इतनी देर से वो भी चुप बैठा था ,वो भी रोने लगा .......

अब कोई IMAGE नहीं आ रही थी ...एक गाना याद आ रहा था ....कर चले वतन तुम्हारे हवाले साथियो..... मैंने दोस्त से कहा , यार ,ये CIVILIANS  कब हमारी तरह बनेगे .. हम देश को बचाते है ..ये फिर वहीँ ले आते है जिसके लिए हम अपनी जान......एक जोर से हिचकी आई मैंने दोस्त का हाथ जोर से दबाया .....और फिर एक अँधेरा...........

--------------------------
PART TWO
-------------------------

दूसरी सुबह कोई बहुत ज्यादा CHANGE नज़र नहीं आया मुझे इस मुल्ख में जिसके लिए मैंने जान दे दी..... ENEMIES WERE STILL AT THE GATE ... NEWSPAPER में कहीं एक छोटी सी खबर थी मेरे बारे में .....POLITICIAN WERE MAKING USELESS STATEMENTS ......किसी क्रिकेट में FIELDING की तारीफ़ की खबर थी .....कोई ये भी तो जाने की एक एक इंच जमीन की FIELDING करते हुए हम जान दे देते है .....कोई मीडिया का राज EXPOSE हुआ था .... कोई सलेब्रटी की मौत हुई थी जिसे मीडिया लगातार COVERAGE में दे रहा था ... कोई रिअलिटी शो में किसी लड़की के AFFAIR की बात थी ... मतलब की सारा देश ठीक ठाक ही थी ......मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैंने जान क्यों दी .......मेरी पत्नी चुप हो गयी थी ..अब उसके आंसू नहीं आ रहे थे ...मेरा दोस्त बार बार रो देता था ....और ख़ुशी.....वो सबसे पूछ रही थी ,पापा को क्या हुआ ,कब उठेंगे , हमें खेलना है न .......................................

Thursday, February 11, 2010

ये मुझे क्या हो गया ....






किसी अनजाने से तेरे बारे में बात करना ;
और जब वो कहे की ये जानां कौन है यार ...

किसी सुबह अपने बगल में तेरा चेहरा ढूँढना ;
और फिर हँसना की मैं पागल हो गया हूँ ...

किसी शाम को उतरते हुए सूरज से ये कहना की,
तेरे चेहरे पर मेरे नाम की किरण बिखराए...

किसी रात को अचानक उठ कर बैठना,
और तेरी तस्वीर से ढेर सारी बात करना

किसी शहर में किसी गली में मुड़ते समय,
अपना हाथ तेरे लिए , तुझे थामने के लिए बढ़ाना ...

अचानक ही अपने कमरे में तुझे देखना ,
और मुस्कराना और ढेरो बाते करना ....

मेरे होंठो पर तेरे लबो का स्वाद ढूंढना ;
फिर तेरे होंठो को हवाओ में ढूंढना ...

हवाओ पर उँगलियों से .....पानी पर उँगलियों से ..
और पेड़ो पर भी अपनी उँगलियों से तेरा नाम लिखना

अकेले होते हुए भी अकेले नहीं होना
तेरे संग बस प्यार करना और सिर्फ प्यार करना

पहली नज़र का पहला जादू ....
अब तक तुम्हे देख रहा हूँ ;
ये मुझे क्या हो गया ....




Tuesday, January 19, 2010

तलाश

कुछ तलाशता हुआ मैं कहाँ आ गया हूँ .....
बहुत कुछ पीछे छूट गया है .....
मेरी बस्ती ये तो नहीं थी .....

मट्टी की वो सोंघी महक ...
कोयल के वो मधुर गीत ...
वो आम के पेड़ो की ठंडी ठंडी छांव ..
वो मदमाती आम के बौरो की खुशबू ...
वो खेतो में बहती सरसराती हवा ....
उन हवा के झोंको से बहलता मन ..
वो गायो के गले बंधी घंटियाँ ...
वो मुर्गियों की उठाती हुई आवाजे ....
वो बहुत सारे बच्चो का साथ साथ चिल्लाना ....
वो सुख दुःख में शामिल चौपाल ....
लम्बी लम्बी बैठके ,गप्पो की …

और सांझ को दरवाजे पर टिमटिमाता छोटा सा दिया .....
वो खपरैल की छप्पर से उठता कैसेला धुआ...
वो चूल्हे पर पकती रोटी की खुशबू ...
वो आँगन में पोते हुए गोबर की गंध ...

वो कुंए पर पानी भरती गोरिया ...
वो उन्हें तांक कर देखते हुए छोरे...
वो होली का छेड़ना , दिवाली का मनाना ...

वो उसका; चेहरे के पल्लू से झांकती हुई आँखे;
वो खेतो में हाथ छुड़ाकर भागते हुए उसके पैर ;
वो उदास आँखों से मेरे शहर को जाती हुई सड़क को देखना

वो माँ के थके हुए हाथ
मेरे लिए रोटी बनाते हाथ
मुझे रातो को थपकी देकर सुलाते हाथ
मेरे आंसू पोछ्ते हुए हाथ
मेरा सामान बांधते हुए हाथ
मेरी जेब में कुछ रुपये रखते हुए हाथ
मुझे संभालते हुए हाथ
मुझे बस पर चढाते हुए हाथ
मुझे ख़त लिखते हुए हाथ
बुढापे की लाठी को कांपते हुए थामते हुए हाथ
मेरा इन्तजार करते करते सूख चुकी आँखों पर रखे हुए हाथ ...

फिर एक दिन हमेशा के हवा में खो जाते  हुए हाथ !!!

न जाने ;
मैं किसकी तलाश में शहर आया था ....

Saturday, January 9, 2010

पाप !!!



दोस्तों ,


मैंने ये कविता 1987 में लिखी थी. ये मेरे एक मित्र की आत्मकथा पर लिखी थी ,इसे लिखने में मुझे बहुत मानसिक उलझन भी थी .. क्योंकि इस कविता की पूरी undertone सिर्फ physical relation पर ही based है ...मैंने अब उस मित्र से permission ली है की इसे मैं ब्लॉग में डालू .. ये एक super psycho poem है .. !!! relationship का canvas बहुत बड़ा होता है और physical activity सिफ एक छोटा हिस्सा होता है ..लेकिन मानव मन कितना दुर्बल है , कितना विवश है , इस छोटे से हिस्से के लिए वो पाप करता है [ anything , which is forced ,and done without interest and in which ,no heart is involved ,can be termed as PAAP ] . मैं इस कविता को पहली बार publish कर रहा हूँ .. मेरा ये प्रयास है इस कविता के सहारे हम एक HUMAN ERROR के MAGNITUDE को समझे की; हम कितने ज्यादा tempt हो जाते है और हम कितने ज्यादा इन जैसी भावनाओ के spell में रहते है ....हमेशा की तरह आपके प्यार और आशीर्वाद की तमन्ना है ...चाहे अच्छे हो या खराब , आपके comments मेरे सर आँखों पर !!!!




पाप !!!


जब कहीं तम,
यौवन की नीरवता की विवश विडंबना सहते रहे
जब हाहाकार लिए रजनी ;
किसी शांत और अनेपिक्षित तूफ़ान की प्रतीक्षा करे
जब अन्धकार के विकसित गर्भ में प्रथम सांस लेती है
पाप की उत्तेजित जागृतता !!
क्या तभी जन्म लेती है मेरी सिसकती कविता ?

जब उत्तेजित पाप प्रथम सांस लेकर
अपने जन्म को कोसते रहे ;
जब अपने निश्चित अंतिम उच्छावास पर,
पपित आवेश लज्जित होते रहे ;
जब खामोश सिसकियाँ भरती है पाप की लज्जा
पाकर अपने अंत की निकटता !!
क्या तभी जन्म लेती है मेरी सिसकती कविता ?

जब अपने कायर अंत का आलिंगन करके
पाप; स्वंय की दुष्टता सहे ,
जब स्वंय की प्रतिछाया , स्वंय को ही,
धिक्कारती, परायी और सिमटी सी लगे;
जब अपने पूर्ण गति को हो प्राप्त ,
फिर प्रारम्भ के लिए छटपटाती है दुर्बल मानसिकता !!
क्या तभी जन्म लेती है मेरी सिसकती कविता ?

जब दुर्बल मानसिकता , प्रारम्भ से लिपट कर
स्वंय को फिर पाप के लिए प्रेरित करे ;
जब प्रेरित हो विवेक तथा मानसिकता के द्वन्द्व में ,
विवश विवेक ; स्वंय को दुर्बल करे,
जब घटित होते पाप को सुनकर, देखकर और छूकर
विजय होती है मानस ह्रदय की दुर्बलता !!!
हाँ..शायद ; तभी जन्म लेती है मेरी विवश कविता !!!

Thursday, December 31, 2009

आप सब को नए साल की शुभकामनाये !!!









दोस्तों

आप सब को नए साल की शुभकामनाये !!!
नया साल, आपकी ज़िन्दगी में ; बहुत सी खुशियाँ लेकर आये , मेरी दिल से यही दुआ है आप सभी के लिए .. और हाँ मेरे desk से कुछ छोटी छोटी बाते जो शायद आपके जीवन में कुछ काम आये .....


१. अपने आप में तथा अपने ईश्वर में विश्वास रखे !

२. आगाध आस्था , सम्पूर्ण विश्वास और अटूट प्रेम के साथ जीत की भावना भी आपके भीतर जागृत होवे..

३. आपको अपने आप से ही compete करना है और आपको जीत अपने आप पर ही [ अपनी कमियाँ etc . ] पर हासिल करनी होंगी ..

४. इस धरा के बेहतरीन मंत्र सिर्फ तीन है : दोस्ती , प्रेम, आदर !!!

५. खुश रहे , चुटकुले सुनाये , खूब हँसे ...इस planet को आपकी ख़ुशी की आवश्यकता है ..

६. और अंत में अपना १०० % देवे ...हमेशा .. चाहे वो देश हो , company हो , समाज हो , या घर हो ....अपना output आप हमेशा सर्वश्रेष्ट देने की कोशिश करे..

आपको फिर से नव वर्ष की ढेर सारी बधाई !!

आपका

विजय

+91 9849746500


1. My blog on shri shirdi saibaba : http://shrisaibabaofshirdi.blogspot.com/

2. My blog of photography : http://photographyofvijay.blogspot.com/

3. My blog of art : http://artofvijay.blogspot.com/

4. My blog on spirituality : http://spiritualityofsoul.blogspot.com/

5. My blog of comic characters : http://comicsofindia.blogspot.com/

6. My blog of my hindi poems : http://poemsofvijay.blogspot.com/


Thursday, December 24, 2009

मेरा नया ब्लॉग : अध्यात्म, जीवन, दर्शन, चिंतन,धर्म और प्रेम पर

दोस्तों ,

नमस्कार, मैंने अध्यात्म,धर्म, जीवन, दर्शन, और चिंतन पर एक ब्लॉग बनाया है ,जो की मेरे अपने अनुभवों का निचोड़ है ,जो कुछ भी मैंने इस छोटी सी उम्र में देखा, जाना, सीखा, पढ़ा, समझा और प्राप्त किया , वही सब कुछ मैंने अपने लेखो के द्वारा इस ब्लॉग में आप सब से बांटना चाहता हूँ , ब्लॉग का नाम है अंतर्यात्रा.... मेरी आप सबसे विनंती है की ,समय निकल कर इस ब्लॉग पर मेरे लेखो को पदियेंगा . बहुत बहुत धन्यवाद. ईश्वर आप सबको सुख , संतोष, ख़ुशी और प्रेम दे . ब्लॉग का लिंक है : http://spiritualityofsoul.blogspot.com/

एक अधूरी [ पूर्ण ] कविता

घर परिवार अब कहाँ रह गए है , अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है अब तो सिर्फ \बस सिर्फ...