Monday, October 23, 2017

एक अधूरी [ पूर्ण ] कविता



घर परिवार अब कहाँ रह गए है ,
अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी
रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है
अब तो सिर्फ \बस सिर्फ नाम बचे है बाकी
तीज त्योहार कहाँ रह गए है
अब तो उपरी दिखावे बचे है बाकी
पुरानी ज़िन्दगी अब कहाँ रह गयी है ,
अब तो बस मोबाइल और इन्टरनेट बचे है बाकी
................


वि ज य

6 comments:

  1. दिनांक 24/10/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...

    ReplyDelete
  2. बहुत सही
    Total Show off

    ReplyDelete
  3. सही कहा

    ReplyDelete
  4. Words cannot express our sorrow on the demise of the very active blogger and a well known writer' Mr.Vijay Kumar Sappatti Ji '.(He expired on April 24th, 2018.He was suffering from cancer.) RIP .May God give his family courage to bear the irreparable loss.May their heart and soul find peace and comfort.

    ReplyDelete

  5. I have watched youtube animated love poem video it is so beautiful and cute with romantic music.
    https://bit.ly/2Ixb07f

    ReplyDelete

एक अधूरी [ पूर्ण ] कविता

घर परिवार अब कहाँ रह गए है , अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है अब तो सिर्फ \बस सिर्फ...