Thursday, April 8, 2010

मोहब्बत




मोहब्बत

कल तुझे डूबते हुए सुर्ख सूरज के साये में
फिर एक बार देखा ...
रात , बड़ी देर तक तेरा साया मेरे साथ ही था ..

एक ख्वाब तेरा चेहरा लिए  ;खुदा के घर से
दबे पाँव मेरी नींद की आगोश में सिमट आया ...
और रात की गहराती परछाईयो  ने ;
तुझे और मुझे ;
अपने इश्क़ की बाहों में समेट लिया ...

सुबह देखा तो तेरी हथेली में मेरा नाम खुदा हुआ था ..
मेरे जिस्म में तेरे अहसास भरे हुए थे ...

बादलो से भरे आसमान से खुदा ने झाँका और
हमें कुछ मोती दिए मोहब्बत की सौगात में ....

कुछ तुमने अपने भीतर समा लिया
कुछ मेरे पलकों के किनारों  पर ;
आंसू बन कर टिक गए ...

खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
मोहब्बत के नाम पर ...
उसे अब ताउम्र एक ही ओक  में पीना है ;
जिसमे एक हथेली तेरी हो
और एक हथेली मेरी हो .....

आओ इस अहसास को जी ले ,
जिसे मोहब्बत कहते है .....



103 comments:

  1. खुबसुरत एहसास मोहब्बत का..

    सुन्दर रचना ..
    आभार ।

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  2. सुबह देखा तो तेरी हथेली में मेरा नाम खुदा हुआ था ..
    मेरे जिस्म में तेरे अहसास भरे हुए थे ...

    अति उत्तम विजयजी. बहुत अच्छा लिखा है. मौहब्बत ही जिंदगी का दूसरा नाम है. जिसने जिंदगी जीने की कला सीख ली उसे मौहब्बत के मायने समझ में आ गए और जिसने मौहब्बत करना सीख लिया उसे जीना आ गया. कुछ दिन पहले मैंने मेरी एक रचना में कुछ ऐसा लिखा था कि -
    "अब मैं जीना सीख गया हूँ
    मैं प्यार करना सीख गया हूँ "
    बहुत धन्यवाद एक सुन्दर शब्दों की माला वाली कविता के लिए.

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  3. परिभाषाओं से परिपूर्ण सुन्दर रचना!

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  4. सुन्दर अहसास मोहब्बत का.

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  5. Waah !! Ati Sundar !! Badhaai !!

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  6. Buzz पर आपकी इस कविता को देख चुका हूँ, बहुत पसन्द आयी कविता !
    प्रेम-कविताओं का बेहतरीन संग्रह है इस ब्लॉग पर ! हर अहसास की प्रेम कविताएं !
    आभार ।

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  7. वाह ! हथेली पर गुदा नाम.. क्या कल्पना है..

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  8. बहुत खूबसूरत एहसास लिये आपकी ये रचना विलक्षण है...बहुत दिन बाद आये लेकिन कमी पूरी कर दी आपने अपनी इस रचना...
    नीरज

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  9. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;


    सुन्दर रचना
    बहुत खुबसुरत एहसास है.
    आभार ।

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  10. bahut hi achhi kavita likhi hain aapne

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  11. Alag alfaaz kahanse laun? Itni sundar rachanane nishabd kar diya!

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  12. बहुत सुन्दर रचना है बधाई।

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  13. पता नहि मैं कैसे आज तक आपके ब्लॉग पर पहुँच नहीं पाया....... !!! आज पहली बार आया और आपकी "मोहब्बत" ने दिल चुरा लिया......... अब आना जाना लगा रहेगा.... ! बहुत ही अच्छी कविता है.... एक-एक शब्द दिल की गहराई में उतर जाता है........... !!! धन्यवाद !!!!

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  14. bahut achchi rachanahai badhayee ho vijay ji

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  15. buzz comment from Mr. Digambhar naswa---

    digamber naswa - Wonderful thought ..

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  16. नमस्कार विजय जी
    आज आप तक पहुंचा तो पाया बहुत कुछ खाली रहा हिस्सा , आज मोहब्बत का दामन थाम रहा है
    आफाक अहमद

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  17. buzz comment from Mr. nadeem Akhtar --

    NADEEM AKHTAR - आपके ब्लॉग में कमेंट लिखने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसमें कमेंट बॉक्स नहीं खुल रहा था। खैर, यहां जो कमेंट दे रहा हूं, उसे ही स्वीकार करें।

    लाजवाब, बहुत ही सुंदर रचना है। वैसे भी आपकी ऐसी कोई रचना नहीं, जिसमें रूमानियत न हो।

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  18. इस सुंदर कविता के लिए बधाई ! मेरे एक शेर को आपने साकार कर दिया है-

    एहसास की दुनिया में रोशन दिल की जागीरें हैं
    कहते हैं जिसे सब प्यार यहाँ ख़ुशबू की लकीरे हैं

    देवमणि पाण्डेय,मुम्बई
    http://devmanipandey.blogspot.com/

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  19. बहुत अच्छे लफ़्ज़ों में आपने
    मुहब्बत को बयां किया है ||
    दिल से दिल को छूती हुई कविता ||

    धन्यवाद .........

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  20. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    जिसमे एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो .....

    ye panktiyan kavita ki jaan hain..........bahut hi sundar ahsaas bhare hein..........mohabbat aisi hi hoti hai jahan 2 kuch nhi hota sab ekhi hota hai.

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  21. विजय जी…अब तो मैं आपका नाम प्रेम कुमार सपत्ति रखना चाहता हूं :-)

    jokes apart...एक अच्छी और सच्ची कविता के लिये बधाई!

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  22. bahut hi badhiya mohabbat ke baare me itni achhi line pehali baar ...padhi hai...

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  23. bahut hi badiya sir
    do check out
    www.simplypoet.com
    World's first multi- lingual poetry portal!!

    do login and post...takki sabhi ko aapki khoobsurat karigari padne
    ka mauka miley ..aur logon ko pata chalee ke aapke jaise kavi abhi tak blogging karte hain!!

    ReplyDelete
  24. recd by orkut scrap from Mr. Sanjay Navrekar..

    sanjay:
    i have read ur poem on mohabbat and posted comment there too....really mohabbat ke baare me aise lines kabhi nahi padhe zindagi me .....infactaap ki doosri kavita ..mrityu....bhi padhi and i think it was ....truth of life.......everybody has to face!!!!!!!!!!!!!!wonderfull....keep it up...

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  25. recd by buzz comments from Mr. rajeev ..

    Rajeev Nandan Dwivedi -

    व्यस्त था आपके ब्लॉग पर नहीं जा सका,
    कविता हमेशा की तरह एक और मास्टर पीस है. जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है.

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  26. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    जिसमे एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो .....

    ye to lajawaab hai. kai baar padh gayi.

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  27. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! सुन्दर एहसास के साथ लाजवाब प्रस्तुती! बहुत बहुत बधाई!

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  28. सुन्दर रचना
    बहुत खुबसुरत एहसास है.
    आभार ।

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  29. खुदा के नूर को मुहब्बत के नाम पर ...
    ओक से पीना एक साथ
    और जीना जिंदगी को
    इस एहसास के साथ ...
    बहुत सुन्दर एहसासों से भरी कविता ......!!

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  30. Pyar ki ehsas ki paati....
    Andaj achha laga.
    Shubhkamnayne

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  31. vijay bhai,
    wah, mohbbat ka yah ahasaas bahut kuch sikhata hai, badhai.
    jisne jivan jeene ki kala samaz li wah mohbbat ke samndar me hi gote lagata rahta hai.
    --kirti rana
    www.pachmel.blogspot.com

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  32. मेरे जिस्म में तेरे अहसास .....
    खुबसुरत मोहब्बत
    अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    सुन्दर
    सुन्दर
    सुन्दर

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  33. सुन्दर अहसासों से भरी हुई है आपकी ये रचना। मोहब्बत के भावों को बहुत खूब उकेरते है। कुछ लाईन तो गजब की है।

    सुबह देखा तो तेरी हथेली में मेरा नाम खुदा हुआ था

    ..........

    खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    जिसमे एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो ...

    सुन्दर।

    ReplyDelete
  34. खूबसूरत अहसासों की बानगी!!

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  35. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    जिसमे एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो .....

    आओ इस अहसास को जी ले ,
    जिसे मोहब्बत कहते है .....
    bahut hi khubsurat....

    ReplyDelete
  36. recd by email from Dr. Prem ....

    प्रिय भाई
    आपकी कविता व्यापक अर्थ से संपन्न है और एक अच्छी कविता में जो संवेदन को संप्रेषित करने का गुण होना चाहिए वोह आपकी कविता में है
    कुछ पंक्तियाँ तो सीधे ह्रदय को सपर्श करती हैं
    बधाई
    Dr. Prem Janmejai
    # 73 Saakshara Appartments
    A- 3 Paschim Vihar, New Delhi - 110063
    Phones:(Home) 011-91-11-25264227
    (Mobile) 9811154440

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  37. प्रेम की अनुभूति को कतरा कतरा शब्दो मे पिरोकर उसकी मादकता से सरोबार कर आपकी लेखनी ने इस स्वप्निल अह्सास को सबके दिल मे उतार दिया है.

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  38. प्रणाम विजय जी ,,, इतनी बेहतरीन और संवेदन शील रचना,, आप ने अंतर्निहित भावनाओ को जो शब्द दिए अदभुद हैमै नतमस्तक हूँ
    खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    जिसमे एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो .....
    अब क्या कहूँ आप की लायने ही मेरी भी बात कह देती है ,,,,
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  39. VIJAY JEE,AAPKEE KAVITA KEE EK-EK
    PANKTI DIL MEIN UTAR GAYEE HAI.
    BAHUT BADHAAEE AUR SHUBH KAMNA.

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  40. recd by email from aadarniya pran sharma ji .....

    VIJAY JEE,

    BAHUT DINON KE BAAD AAPKEE DIL MEIN UTAR JAANE WAALEE KAVITA PADHEE HAI.AAPKEE KAVITA PADHKAR MUJHE APNEE GAZAL KE CHAND SHER YAAD AA GAYE HAIN--

    PYAR KARNA SIKHAA DIYA TOONE
    ROG KAESA LAGAA DIYA TOONE
    EK YE BHEE HAI TEREE DAANAAEE
    MUJHKO PAGAL BANAA DIYA TOONE
    KHWAAB DEKHA TO YE HUA MAHSOOS
    MUJHKO AAKAR JAGAA DIYA TOONE
    UF, YE TERE SHABAAB KEE GARMEE
    MERA TAN-MAN JALAA DIYAA TOONE

    AAP ISEE TARAH LIKHTE RAHEN,KUCHH APNEE,KUCHH JAG KEE AUR KUCHH PYAAR BHAREE BAATEN.

    SHUBH KAMNAAON KE SAATH,

    PRAN SHARMA

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  41. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;


    bahut sunder lines...........
    jaise papihey ki barst ke liye pyas .......

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  42. उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;
    जिसमे एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो .....
    खूबसूरत खयाल
    काश ....

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  43. एक अरसे के बाद आये ...
    लेकिन मुहब्बत का ऐसा नायाब तोहफा ले कर आये
    खुशामदीद

    एक एक लफ्ज़ में मुहब्बत की धड़कन सुनाई दे रही है
    आपके मन की बात,,जाने कितने दिलों की
    बात हो गयी है .....
    ज़िन्दगी और मुहोब्बत
    मुहोब्बत और ज़िन्दगी
    दोनों को एक कर दिखाया आपने ...
    बधाई

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  44. बहुत सुन्दर........
    अंत गजब का है 1 बहुत दिनों के बाद आपकी नई कविता पढने को मिली

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  45. bahot khoob. agli rachna ka intejar hai.

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  46. Fantastic. Really very romantic. Fresh imagery.
    Bhuvendra Tyagi
    Navbharat Times,
    Mumbai

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  47. recd. by email from Ms.Shipla.....

    Bhai Shri Vijayji,

    Namaste,
    Apki kavita aur aapka parichay pakar khushi hui. Aache vichar achi
    rachna main dhalkar aaye hain.Badhai.
    Vaise aapko mera parichay kahan se prapt hua suchit kare, taki main
    unhe apse milwane ke liye dhanyawad de sakun.
    Subhakamnaon Sahit,

    Bhavdiya,
    Shilpa

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  48. recd. by email from Mr.Gangaprasad.....

    Dear sir,

    these are nice poets.

    Ganga

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  49. खुदा के दिये मोतियों को अंत तक बॉंधने की आपकी काव्‍यात्‍मक अभिव्‍यक्ति बहुत सशक्‍त है और हिन्‍दी काव्‍य में संग्रहणीय है।
    बधाई।

    ReplyDelete
  50. मेरे जिस्म में तेरे अहसास .....
    पूरी कविता चलचित्र की भांति समा गई आंखों में...मोहब्बत के खूबसूरत एहसास जो सिर्फ़ मोहब्बत करने वालों के लिए खुदा की नेमत हैं.विजय कुमार जी बहुत-बहुत बधाई इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए!!!

    ReplyDelete
  51. bahut khoob Vijay Bhai,bahut khoob.

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  52. बहुत गहराई वाली कविता है विजय जी!
    पढ़ कर आनन्द आ गया ।

    ReplyDelete
  53. बहुत बेहतरीन प्रस्तुती.मन के भाव कितनी सहजता के साथ सामने आये है खुबसुरत एहसास मोहब्बत का सुन्दर रचना
    आभार ।

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  54. बहुत खूबसूरत ढंग से मोहब्बत के एहसास को कलमबद्ध किया ही बधाई...!!

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  55. recd by email from Mr. Md.Aftab Alaam ....

    आदरणीय श्री विजय जी, नमस्कार
    आपकी कविताओं का रसास्वाद लिया। बहुत अच्छी रचना है। इसमें गहराई है और अनोखापन है। ऐसी कविताओं को बार-बार पढ़ने का मन करता है। वरना आजकल तो लोग ऐसी कविताएं करते हैं कि वह किसी भी कोण से कविता कहलाने लायक नहीं रह जाती।

    बादलों से भरे आसमान से खुदा ने झांका और
    हमें कुछ मोती दिए मोहब्बत की सौगात में......

    वाह क्या कहने............एक नया कान्सेप्ट है। बहुत अच्छा लगा।

    आप ऐसी ही ढेर सारी रचनाओं से हम पाठकों को मालामाल करें, यही मेरी दुआ है।

    आफताब आलम
    संपादक, पत्रकारिता कोश/मीडिया डायरेक्टरी
    मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

    Mobile : 09224169416
    Email: aftaby2k@hotmail.com
    www.hindustanimedia.com

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  56. recd. by email from Ms.Veena Chopara ...

    DIL KO CHHU GAYI HAI AAPKI KAVITA! Bahut hi pyare ahsaas hain!

    Veena

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  57. recd by email from Ms. Abhilasha ......

    बहुत सुन्दर..बधाई. सप्तरंगी प्रेम के लिए आपकी प्रेम आधारित रचनाएँ आमंत्रित हैं.
    सादर,
    अभिलाषा
    www.saptrangiprem.blogspot.com

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  58. recd. by email from Ms. Vidya ...

    ............

    very nice poem
    all the best

    ReplyDelete
  59. recd. by email from Shri kavi sunil jogi ji ...

    badhayi.

    sunil jogi

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  60. bahut hi khubsurat rachna

    mohbbat ke ehsaas ka achha varnan kiya hai

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  61. वाह क्या कल्पना है ... एक हाथ तेरा हो एक मेरा हो ... एक ही ओक से पीना है मुहब्बत के नूर को ....
    बहुत ही लाजवाब और खूबसूरत नज़्म ... प्यार का नूर बिखेरते ...

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  62. बहुत ही खूबसूरत रचना !
    न जाने कितने अहसासों को महसूस करा देती .

    आप को अनेकों शुभकामनायें !

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  63. बहुत सुन्दर रचना है बधाई।

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  64. बहुत ही ख़ूबसूरत भाव लिए हुआ है यह रचना....मुहब्बत के अहसास से लबरेज़ बहुत खूब..

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  65. भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

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  66. खूबसूरत अहसासों को शब्दों और चित्रों से सजा दिए आपने ! प्रेम के सांझेपन की अनूठी रचना ! आभार ! मेरी कविता मेरा ब्लॉग पसंद करने के लिए पुनह आभार !

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  67. बहुत दिनों के बाद आये हैं आप, लेकिन इतनी सुन्दर कविता के साथ कि उसने इस अन्तराल की भरपायी कर दी. बधाई.

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  68. antas ki gahraiyo se nikli aur sundar shabdo me dhali ek acchhi rachna.badhai

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  69. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है ;

    बहुत ख़ूबसूरत रचना!

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  70. विजय जी,
    आपकी कविता के बारे में आैर जो तस्वीर आपने चस्पा की है उसे देखकर जो शेर याद आया उसे ही टिप्पणी के रूप में स्वीकार करें -

    "डूबते सूरज को तस्वीरों में कैद कर चुका हूं मैं
    देखना भर है इतना कि शाम कैसे ढल पाती है"

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  71. खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है
    kya gazab ke alfaz hai ,itne dino ki kami is khoobsurat nazarane ne poori kar di ,sundar aur adbhut ahsaas .

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  72. आओ इस अहसास को जी लें
    जिसे मोहब्बत कहते हैं ।
    यही जज्बा़ हो तो ये दुनिया कितनी खूबसूरत हो ।
    बहुत दिनों बाद आई आपके ब्लॉग पर पर आना सार्थक हो गया ।

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  73. aurangabad se madhu
    vijay ji bahot hi sundar rachana hai.

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  74. zaabardast...

    kamaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaal...........








    NICCCCCCCCCE............






    gooooooooooooooood.....

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  75. पहली बार यहाँ आना हुआ और ...अब क्या कहूँ ! जो नूर की बूँद मिली वो अद्भुत !!!अभी कुछ और लिखने के लिए शब्द चुक गए हैं ...बस उन पाक़ फिज़ाओं मे गुम हूँ ।

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  76. bahut dino bad shairy padhi, achcha laga. very nice.

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  77. मोहब्बत का बहुत ही ख़ूबसूरत ...निर्मल एवं कोमल एहसास

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  78. बहुत अच्छे विजय जी |

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  79. 89 logon ki ray aa chuki ha meri jarurat to nahi par mujhe rachna bahut pasnd aayi isliye khud ko rok nahi payi...bahut2 badhai sundar bhavon ki abhivayakti ke liye...

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  80. एक हथेली तेरी और एक मेरी हो
    क्या बात कही
    बहुत अच्छे अहसास एक बार फिर

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  81. सुखद प्यार की कल्पना भावपूर्ण एहसास।
    विजय, विजय को मिल सके चाह सुमन की खास।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  82. recd. by email from Mr. Sumeet Bhingare ...

    dear sir.
    that is a good poem
    thank you sir

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  83. hello Sirji.........
    खुदा ने जो नूर की बूँद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ...........

    bahut hi lajawab vichar hai..............
    ..........Shubhkamnaye
    from _- AMAN KUMAR CHOLKAR
    ( Bhopal )

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  84. आपकी कविता बहुत सुन्दर एहसासों से भरी हुई है।

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  85. bahut khoobsurat ehsaas hain
    aur utna hi achcha baya karne ka andaj
    hame ummed hai aur bhi sunder kavitayen padhne ko milengi
    dhanyawad

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  86. मोहब्बत में डूबी और एहसासों से भरी हुई बहुत प्यारी रचना है ये.
    एक लम्बे अर्से बाद आ सका लेकिन बहुत प्यारी रचना पढ़ कर जा रहा हूँ .

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  87. wah! kya baat hai ! bahut khoob, behtreen, behad umda! Khuda kare janab ki sukhnwari aane wale waqton me bhi yun hi wah-wahi luutatii rahe.

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  88. वाह! आनंद आगया पढ़कर.
    कुछ तुमें अपने भीतर समा लिया
    कुछ मेरी पलकों के किनारों पर;
    आंसू बनकर टिक कए...

    खुदा ने जो नूर की बूंद दी है
    मोहब्बत के नाम पर ..
    उसे अब ताउम्र एक ही ओक में पीना है
    जिसमें एक हथेली तेरी हो
    और एक हथेली मेरी हो .....
    बहुत सुन्दर भाव हैं. मन को छू गई!
    बधाई स्वीकारें.
    महावीर शर्मा

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  89. recd. by email.. from Ms. Jayashree..

    Very nice poem

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