Tuesday, January 1, 2013

भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!















भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा,
रवि ने किया दूर ,जग का दुःख भरा अन्धकार ;
किरणों ने बिछाया जाल ,स्वर्णिम और मधुर
अश्व खींच रहें है रविरथ को अपनी मंजिल की ओर ;
तू भी हे मानव , जीवन रूपी रथ का सार्थ बन जा !
भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!

सुंदर सुबह का स्वागत ,पक्षिगण ये कर रहे
रही कोयल कूक बागों में और भौंरें मस्त तान गुंजा रहे ,
स्वर निकले जो पक्षी-कंठ से ,मधुर वे मन को हर रहे ;
तू भी हे मानव , जीवन रूपी गगन का पक्षी बन जा !
भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!

खिलकर कलियों ने खोले ,सुंदर होंठ अपने ,
फूलों ने मुस्कराकर सजाये जीवन के नए सपने ,
पर्णों पर पड़ी ओस ,लगी मोतियों सी चमकने ,
तू भी हे मानव ,जीवन रूपी मधुबन का माली बन जा !
भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!

प्रभात की ये रुपहली किरने ,प्रभु की अर्चना कर रही
साथ ही इसके ; घंटियाँ मंदिरों की एक मधुर धुन दे रही ,
मन्त्र और श्लोक प्राचीन , देवताओं को पुकार रही,
तू भी हे मानव ,जीवन रूपी देवालय का पुजारी बन जा !
भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!

प्रक्रति ,जीवन के इस नए भोर का स्वागत कर रही
प्रभु की सारी सृष्टि ,इस भोर का अभिनन्दन कर रही ,
और वसुंधरा पर ,एक नए युग ,एक नये जीवन का आव्हान कर रही ,
तू भी हे मानव ,इस जीवन रूपी सृष्टि का एक अंग बन जा !
भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!

भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!!

फोटोग्राफी और कविता © विजय कुमार

9 comments:

  1. भोर भई मनुज अब तो तू उठ जा !!
    ..जागना जरुरी है .....
    नए साल पर सुन्दर कामना भरी प्रस्तुति ..
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

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  2. बहुत खुबसूरत रचना , नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

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  3. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. बहुत प्रभावी अभिव्यक्ति..नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

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  5. प्रभात की ये रुपहली किरने ,प्रभु की अर्चना कर रही
    साथ ही इसके ; घंटियाँ मंदिरों की एक मधुर धुन दे रही ,

    नव वर्ष की शुभ कामनाएं....

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  6. कोई जगाए,कोई झकझोरे,कोई कहे
    उठ,नए विश्वास से बंजर धारा से खुद को जोड़
    बधिर नभ को अपने ही मौन की किलकारियों से फोड |


    नयी उम्मीदों के साथ नववर्ष की शुभकामनाएँ


    फोटोग्राफी बहुत अच्छी है

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  7. नववर्ष की मंगल् कामनाएँ

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  8. उठ आ, सूरज भी उठ आया,
    व्यर्थ कर्म का समय गँवाया।

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