Sunday, July 17, 2011

मुझे यकीन है ….

मुझे यकीन है ….

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
अक्सर मेरे ख़तों के इंतजार में ,
अपने दरवाज़े पर खड़े होकर ;
अपने खुले हुए गेसुओ में ;
अपनी नाज़ुक उँगलियाँ ,
कुछ बैचेनी से अनजाने में लपेटते हुए
ख़त लाने वाले का इंतजार करती हो ....!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
अक्सर धुंधलाती हुई शामों में
धूल से भरी सडको पर .
बेसब्री से , भरी हुई आँखों में
आंसुओं को थामे , कुछ सिसकते हुए..
हर आते जाते हुए सायो में .
किसी अपने के साये का इंतजार करती हो ......!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
अक्सर मेरी आवाज सुनने को बैचेन रहती हो
दौड़ दौड़ कर ,एक यकीन के साथ
कुछ मेरी यादो के साथ
कुछ अपने मोहब्बत के सायों से लिपटे हुए
मदहोश सी , मेरी आवाज़ सुनने चली आती हो.....!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
फिर क्यों तुम,
रातों को जब सारा जहाँ सो जाये
तो, तुम तारो से बातें करती हो
कुछ अपने बारें में ,कुछ मेरे बारें में
कुछ गिले शिकवे , कुछ प्यार
ये सब कुछ ,मेरी नज़मो / ख़तों को पढ़ते हुए
मुझे याद करते हुए , क्यों तकियों को भिगोती हो.....!!!

तुम कहती हो कि ,
तुम मुझसे प्यार नही करती हो
पर मुझे यकीन है कि
तुम मुझे प्यार करती हो……!!!!

35 comments:

  1. बहुत खूबसूरती प्यार के भावो को शब्दों में पिरोया है आपने..

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  2. सच कहा आपने ...ये प्यार ही तो है .. सुन्दर भावमय प्रस्तुति

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  3. बहुत सुंदर। एक गाना याद आ गया ...
    वो पास रहें या दूर रहें, नज़रों में समाए रहते हैं इतना तो बता दे कोई मुझे क्या .....!

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  4. लगता है मुझ से डरते हो,
    फिर ये ख़त क्यों लिखते हो?

    सोचा था सब भूल गए हो,
    याद कभी ना करते हो.
    अपनी मस्ती में जीते हो,
    अपनी दुनिया में रहते हो.

    फिर ये ख़त क्यों लिखते हो?
    -------------------

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  5. वह कभी नहीं कहेगी
    वह मुझे प्यार करती है
    समझना होगा इशारों से ही ...

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  6. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  7. आपका यकीन करने की ज्यादा पुख्ता वजह है....

    उम्दा अभिव्यक्ति!!

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  8. प्यार को शब्दों से नहीं बांधा जा सकता वह तो अनकहा ही होता है।
    बहुत ही सुंदर भावनाओं से ओतप्रोत कविता है। बधाई।
    -डॉ. रत्ना वर्मा

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  9. Email :

    प्रिय भाई,

    कविता पढ़ ली. बहुत सुन्दर. बधाई.

    रूपसिंह चन्देल

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  10. बहुत ही भावपूर्ण एवं बेहतरीन रचना ! हर शब्द सार्थक एवं हर भाव प्रभावशाली है ! बधाई !

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  11. क्यों यकीन को हवा देते हो
    बुझे शोले जला नही करते

    अब इससे ज्यादा क्या कहूँ …………
    ऐसी बातें खुलेआम नही किया करते

    कैसे वो कह पायेगी दिल की बात
    जो ना निकली हो कभी तारो के साथ

    यकीन तुम कर लो इतना
    लब रहेंगे खामोश मगर
    नज़र कह जायेगी हर बात


    अब मै भी इससे आगे नही कह सकती विजय जी …………शायद ऐसा ही कुछ आपकी कविता की प्रेयसी आपसे कहना चाहेगी………

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  12. अब जक जितनी भी कविता पढ़ी आपकी....ऐसा लगता है मन में एक ही प्रश्न बार-बार उभरता है और बार-बार कुछ नए व्योम की रचना कर जाता है.... अंतहीन व्योम विचारों के विचरते रहने के लिए....

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  13. VIJAY KUMAR JI , MERAA EK SHER

    SUNIYEGA -

    VO PYAR KEE NIRAALEE

    DUNIYA MEIN KHO GAYE HAIN

    TUMKO BANAA KE APNAA

    KUCHH AUR HO GAYE HAIN

    KHOOBSOORAT KAVITA KE LIYE

    AAPKO BADHAAEE AUR SHUBH KAMNA .

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  14. nari ke suloml antrmn kee snkochshil prvriti ko achchha vykt kiya hai

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  15. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, बधाई.

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  16. खतों का इन्तजार, प्यार का इजहार
    बहुत ही सुन्दर कविता।

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  17. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11-7-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  18. Email:

    Bhai Shri Vijayji,

    apki kavita ka pahla paragraph bahut accha laga, aur kavita ka thought badhiya hai.Bahut kuch socha ja sakta hai. sunder rachana ke liye
    badhai.

    Dhanyavad aur shubhkamnayen.

    Regards,
    Shilpa

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  19. यकीन तुम कर लो इतना
    लब रहेंगे खामोश मगर
    नज़र कह जायेगी हर बात

    वाह ...बहुत ही खूबसूरत शब्‍द रचना ।

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  20. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण कविता है! बधाई !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  21. सुन्दर कविता .. बेहद भावपूर्ण !

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  22. प्यार के धागे में शब्दों की खूबसूरत लड़िया पिरो दी आपने इस कविता के माध्यम से। सचमुच मजा आ गया पढ़कर।

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  23. बहुत ही सुंदर भावनाओं से ओतप्रोत कविता है।

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  24. सच कहा आपने ...ये प्यार ही तो है .. सुन्दर भावमय प्रस्तुति

    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

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  25. sach ke ehsaso me bhigi prem pagi rachna.

    yahan bhi padhare

    http://anamika7577.blogspot.com/2011/07/blog-post_13.html

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  26. kaun kahta hai wo aapse pyaar nahi karti... itna pyaar bhara pada hai aapke liye uske dil mein... bas wo bayaan nahi karti... aapne kar diya bayaan uske dil kee baat apne kalam se... laajawaab...

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  27. This comment has been removed by the author.

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  28. This comment has been removed by the author.

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  29. सही कहा विजय जी.यदि चाहत नहीं है,प्यार नहीं है तो ये बेसब्री-भरा इन्तजार क्यों है.दूसरों में अपनों की परछाई महसूस करना,दूसरों के पद-चाप में अपने किसी खास के पद-चाप की आवाज सुनना क्या है.ऐसा ही होता है जब प्यार किसी से होता है.बहुत सुन्दर.

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  30. सुन्दर भावमय प्रस्तुति

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  31. पुरुष के लिए "हाँ" और "ना" में फर्क है पर वही स्त्री की दृष्टि में एकाकार होकर "हाँ" है. "ना" कहना "हाँ" कहने का कितना प्यारा अंदाज़ है ! यह अंदाज़ "हाँ" कहने में उतना वज़नदार नहीं है विजय जी ! ख़ूबसूरत रचना !

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