Tuesday, April 17, 2012

पूरे चाँद की रात....!!!




आज फिर पूरे चाँद की रात है ;
और साथ में बहुत से अनजाने तारे भी है...
और कुछ बैचेन से बादल भी है ..

इन्हे देख रहा हूँ और तुम्हे याद करता हूँ..

खुदा जाने ;
तुम इस वक्त क्या कर रही होंगी…..

खुदा जाने ;
तुम्हे अब मेरा नाम भी याद है या नही..

आज फिर पूरे चाँद की रात है !!!

17 comments:

  1. बहुत खूब विजय जी ... चाँद कों देख के किसी की याद आना सहज है ... वो भी जरूर याद कर रही होंगी ....

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  2. पूरे चाँद की रात(पुर्णिमा) में समुन्दर को उछाल लेते देखी हूँ .... !
    आज उसकी तुलना आपकी रचना से ,मन समुन्दर से कम तो नहीं होता .... !!

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  3. बहुत सुन्दर रचना...प्रिय की याद में!....आभार!

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  4. चाँद तो संदेशवाहक है उसी से पूछिए...........

    सुंदर रचना.

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  5. चाँद को देख कर अप्रभावित रह पाना असंभव है.

    सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति.

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  6. कुछ तो बात होगी तुझ में ,जो मैं तुझे ही देखता हूँ
    ठहर ठहर के जला दिया दिल ,ये ही हर बार क्यूँ सोचता हूँ |.....अनु

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  7. पूरा चाँद तो पूरी बात जानता ही होगा।

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  8. खुदा जाने ;
    तुम इस वक्त क्या कर रही होंगी…..
    खुदा जाने ;
    तुम्हे अब मेरा नाम भी याद है या नही

    आगे मै अपने ख्याल प्रस्तुत कर रही हूँ विजय जी :

    यूँ ही नही पूरे चाँद की रात मे तुम याद आई हो
    यूँ ही नही आज रात चाँद भी मुस्काया है
    जरूर तुमने भी कोई यादों का छोर आँचल से निकाला है
    बिना कारण यादें और चांद का मिलन नही होता
    कुछ तो सबब होगा ना ……
    कोई कशिश जरूर तेरी यादों मे भी झिलमिलायी होगी
    यूँ ही नही पूरे चाँद की रात मे
    तेरी तस्वीर मेरी निगाहों मे उतर आयी होगी
    जरूर तुझे भी कहीं ना कहीं मेरी याद जरूर आयी होगी
    तुम्हारी हिचकी इसका प्रमाण है …………तुम जानती हो ना जानां

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  9. आज फिर पूरे चाँद की रात है ;
    और साथ में बहुत से अनजाने तारे भी है...
    और कुछ बैचेन से बादल भी है ..
    ...sunder vijay ji chand hai hi aisa khushi me bhi saath aur yaadon me bhi saath . chand ki bas kya hai baat .

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  10. कल 24/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  11. मधु स्मृतियाँ :)

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  12. बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति....
    सुन्दर रचना...

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