Monday, December 9, 2013

ज़िन्दगी




भीगा सा दिन, 
भीगी सी आँखें,
भीगा सा मन ,
और भीगी सी रात है !

कुछ पुराने ख़त ,
एक तेरा चेहरा,
और कुछ तेरी बात है !

ऐसे ही कई टुकड़ा टुकड़ा दिन
और कई  टुकड़ा टुकड़ा राते
हमने ज़िन्दगी की साँसों तले काटी थी !

न दिन रहे और न राते,
न ज़िन्दगी रही और न तेरी बाते !

कोई खुदा से जाकर कह तो दे,
मुझे उसकी कायनात पर अब भरोसा न रहा !

नज़्म  © विजय कुमार

9 comments:

  1. बहुत सुंदर भावों की अभिव्यक्ति.....!!

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  2. स्मृतियों में उताराती शब्दों की नाव

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  3. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि कि चर्चा कल मंगलवार १०/१२/१३ को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहाँ स्वागत है ---यहाँ भी आइये --बेजुबाँ होते अगर तुम बुत बना देते
    Rajesh Kumari at HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR

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  4. सुन्दर भावों की सुन्दर अभिवक्ति !
    नई पोस्ट भाव -मछलियाँ
    new post हाइगा -जानवर

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  5. वाह बहुत सुन्दर भाव उकेरे हैं

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  6. बहोत खूबसूरत...

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  7. टुकड़ों में बटी जिंदगी

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