Saturday, October 17, 2015

एक ज़िन्दगी

एक ज़िन्दगी
और कितने सारे ख्वाब
बस एक रात की सुबह का भी पता नहीं ....
कितनी किताबे पढना है बाकी
कितने सिनेमा देखना है बाकी
कितने जगहों पर जाना है बाकी
हक़ीकत में एक पूरी ज़िन्दगी जीना है बाकी !
एक ज़िन्दगी
और कितने सारे ख्वाब
बस एक रात की सुबह का भी पता नहीं ....
© विजय

5 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, दिमागी हालत - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. एक ज़िन्दगी
    और कितने सारे ख्वाब
    बस एक रात की सुबह का भी पता नहीं ....
    यथार्थ को इंगित करती एक सुन्दर अभिव्यक्ति

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  3. बहुत सुन्दर रचना
    आपको जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक मंगलकामनाएं!

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