Wednesday, October 7, 2009

तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?



तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?


अचानक ही ये कैसे अहसास है
कुछ नाम दूं इसे
या फिर ;
अपने मौन के साथ जोड़ दूं इसे

किसी मौसम का नया रंग हो शायद
या फिर हो ज़िन्दगी की अनजानी आहट
एक सुबह हो ,सूरज का नया रूप लिये

पता नहीं …..
मेरी अभिव्यक्ति की ये नयी परिभाषा है

ये कैसे नये अहसास है
मौन के भी शब्द होतें है
क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....

पलाश की आग के संग ...
गुलमोहर के हो बहुत से रंग
और हो रजनीगंधा की गंध
जो छा रही है मन पर
और तन पर
तेरे नाम के संग …..

तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?

77 comments:

  1. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....

    aah............in shabdon ne to jaadoo sa bhar diya hai.........prem sirf prem hota hai uska naam kab hota hai..........bas wo hi khojta firta hai insaan.

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  2. अच्छा लगा आपके ये भाव पढ़कर

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  3. पलाश की आग के संग ...
    गुलमोहर के हो बहुत से रंग
    और हो रजनीगंधा की गंध
    जो छा रही है मन पर
    और तन पर
    तेरे नाम के संग …..

    तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?

    सच कहा प्रेम का नाम नहीं होता है...
    बेहद ही सुंदर रचना...
    मीत

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  4. बहुत सुंदर भाव हैं।
    करवाचौथ और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
    ----------
    बोटी-बोटी जिस्म नुचवाना कैसा लगता होगा?

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  5. अभिव्यक्ति की नई परिभाषा कहें या कोई पुरानी यादों का नया रूप जिसे आप व्यक्त कर रहें है.
    बहुत बढ़िया लिखा आपने..प्रेम की परिभाषा बहुत सुंदर समझाया आपने कविता के माध्यम से..
    बढ़िया कविता..बधाई..

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  6. बहुत शानदार, लाजवाब.....वाह....

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  7. मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ आपकी सारी टिप्पणियों के लिए! पर एक गुज़ारिश है कि मैं आपसे बहुत छोटी हूँ इसलिए मुझसे माफ़ी मत माँगा कीजिये! आप काम में शायद व्यस्त थे इसलिए मेरे ब्लॉग पर आ नहीं सके पर जब भी वक्त मिले मेरे ब्लॉग पर आते रहिएगा!
    बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!

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  8. thnx for the compliment n thnx to let me find dis very beautiful blog...
    maine mann ki kavita kahi lekin aapne kavita ka mann padh liya...
    bahut sundar rachnayein hain...

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  9. बहुत से नाम , बहुत से रंग, बहुत से रूप - सर्वत्र प्रेम !

    रचना ने लुभाया बहुत । आभार ।

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  10. आपकी रचना को पढकर एक सीरियल याद आ गया। शायद पलाश के फूल नाम था उसका। आपकी रचना के भावों को पढकर आनंद आ गया। और हाँ सच ही कहा आपने "मौन के भी शब्द होते है।" सुंदर रचना।

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  11. मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....
    जी हाँ मौन के बहुत सशक्त शब्द होते है
    I can hear the sounds
    With your singing dart.
    Silence is the best speaker
    Hear the sound by heart.

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  12. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

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  13. बहुत सुंदर कविता, एक सुंदर सा अहसास
    धन्यवाद
    करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाये,

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  14. बेहद भीनी-भीनी ख़ुशबुओं के दरिया में डुबोती हुई कविता।

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  15. Pyar ek aisa ehsaas hai, jiskee paribhasha karna mushkil hai..

    hamesha, Gulazar kee wo panktiya yaad aa jaatee hai,' hamne dekhee hai un aakhon ke mahktee khushbu, pyarko prar hee rahne do,koyee naam na do, haathse chhuke ise rishton ka ilzaam na do..'

    Aapki tippanee ke shukrguzar hun...lekin naam likhneme kuchh gadabdee/galatfehmee ho gayee hai..mai kshama hun, shama nahee! Bura to nahee mana? Is kshma ko kshama kar den!

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  16. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो

    Sundar aur bhavpurn abhivyakti.Shubkamnayen.

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  17. प्रेम को तलाशती एक उम्दा रचना । पढ़कर अच्छा लगा ।

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  18. विजय जी
    आप की ये रचना बहुत पसंद आयी...ऐसे ही लिखा करें...
    नीरज

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  19. bahut hi khoobsurat kavita
    moun ki zubaan hoti hai
    jo sun pata hai wo sun leta hai

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  20. अच्छी लगी आपकी कविता.

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  21. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है विजय भाई
    सादर, स स्नेह,
    - लावण्या

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  22. किसी मौसम का नया रंग हो शायद
    या फिर हो ज़िन्दगी की अनजानी आहट
    एक सुबह हो ,सूरज का नया रूप लिये

    huzoor !!
    subah ki suhaani oas mei bhigi hui
    makhmalee aur sandalee rachnaa keh daali aapne....
    har nayi aahat ko bolte-hue shabd mil gaye hoN jaise....
    Neeraj bhai ki asheesh mil gayi
    hai...samajho sb saarthak ho gayaa

    badhaaee
    ---MUFLIS---

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  23. सुन्दर कविता है.

    आपकी कविता पढ कर एक मशहूर गाना याद आ गया
    "हमने देखी हैं इन आंखों की महकती खुश्बू... हाथ से छू के इसे रिश्तों का इलजाम न दो
    सिर्फ़ अहसास है.. रूह से महसूस करो
    प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो

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  24. bhut sundar sabdo ma dhala ha........

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  25. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो
    मौन के शब्द सिर्फ प्रेम ही सुन सकता है ।बधाइ इस सुन्दर कविता के लिये

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  26. कविता के साथ-साथ प्रतीक भी बहुत बढ़िया हैं।
    बधाई!

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  27. आदरणीय विजय भाई
    बहुत ही भाव-समपन्न कविता लिखी है आपने .बधाई!
    आपकी ओर से हमेशा ऐसी ही भाव-समपन्न कविताओं की प्रतीक्षा रहती है:

    आपकी कविता पढ़ कर मुझे भी एक ख़ूबसूरत शेर याद आ गया.
    मेरे स्वर्गीय पिता मनोहर "साग़र" पालमपुरी साहब का है:

    ’प्यार अल्फ़ाज़ के घेरों में कहाँ होता है
    प्यार होता है वहाँ दर्द जहाँ होता है’

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  28. कविता में काफी गहराई है, हम सरसरी नज़र से पढ़ गए.
    अतः कुछ ख़ास नहीं लगी.
    हमारी जल्दीपना ही दोषी अन्यथा आपकी हर कविता हमें एक नवीन दुनिया में ले जाती है, कहीं बादलों के पार, अनजाने देश में.
    :)

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  29. पलाश की आग के संग ...
    गुलमोहर के हो बहुत से रंग
    और हो रजनीगंधा की गंध....

    लाजवाब अभिव्यक्ति VIJAY जी ......... भाव पूर्ण रचना

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  30. प्रणाम गुरुबर काफी समय बाद आप के ब्लॉग पर आ पाया हूँ माफ़ी चाहूँगा इतने दिन ब्लोगिंग से दूर रहने के कारण ,,
    मै ना जाने कितनी अमूल्य रचनाओं से दूर रहा पर आप की इस कविता ने जैसे अकेले ही उन सब की पूर्ति कर दी हो ,,
    मै तो धन्य हूँ गयाम,,,
    मेरा प्रणाम स्वीकार करे
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  31. खत्म हो जाते हैं मेरे लफ़्ज़ जहाँ,वहीं से शुरु होता है मेरे जज़्बात का सफ़र...,तो जाहिर है मौन तो होगा ही. यही मौन ही तो प्रेम की अनुभूति है. बहुत ही सुन्दर विजय जी...! आपकी रचनाओं को पढना हमेशा ही एक खूबसूरत अहसास से गुज़रने जैसा होता है. खुदा आपकी कलम को लम्बी उम्र बख्शे-यही दुआ है!

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  32. खूबसूरत रचना है विजय जी ...ऐसे ही लिखते रहें.

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  33. Vijay bhai

    Ye kavita hai. padh kar achha laga. bus aise hee likhtey rahiye. Aap ko apni baat mein wazan paida kartey rehna hai.

    badhaai

    Tejendra Sharma
    General Secretary
    Katha UK, London

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  34. पारे की तरह चंचल भावों को बाँधना
    मनभावन महक को अहसासो में कैद करना
    भला आपसे अच्छा कौन जानता है?

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  35. बहोत ही बढिया|

    अभिनंदन|

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  36. प्रेम भाव की अभिव्‍यक्ति, सब के लिए इतनी सरलता और तरलता से संभव नहीं है, जो सच्‍चा प्रेमी होगा, प्रेम में पगना जाना होगा उसी की ऐसी अभिव्‍यक्ति हो सकती है,
    अच्‍छी प्रेमाभवाभिव्‍यक्ति है,
    आपकी कविता के लिए शुभकामनाएं अर्पित करता हूं , सहजता से स्‍वीकार करेंगे,
    आप का मिञ,
    अरूण कुमार झा

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  37. मौन के भी शब्द होते - वाह विजय भाई। खूबसूरत भाव की रचना।

    सादर
    श्यामल सुमन
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  38. विजय जी इस कविता मे प्रेम और उससे जुडे बिबिध अह्सास का काव्यमय चित्रण है

    प्रेम को नाम की जरूरत ही नही है ये तो एक अहसास है जिसे जिया जाता है और याद किया जाता है. जैसे समन्दर की लहर का कोई नाम नही होता शीतल हवा का कोइ नाम नही होता, दिल की धदकन का कोई नाम नही होता.

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  39. विजय जी ,स्वप्न लोक में ले जाने वाली इस रचना के लिए बहुत बहुत बधाई .अरुण कुमार झा जी ने सही कहा है जो सच्चा प्रेमी होगा वही ऐसी रचना लिख सकता है .आप तो बस ऐसी ही प्रेमपूर्ण ,भावपूर्ण कविताएँ ही लिखा कीजिये .बधाई और शुभकामनायें .आपके लिए ,आपके प्रेम के लिए

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  40. vijay ji,

    maun mukhar ho utha hai...

    sundar abhivyakti......badhai

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  41. priy Vijay ji
    duniyadar nigahon mein to ye drishtta hai lekin kavita aur kaviyon se mere pyar ka ijhar kuchh isi dhang se ho pata hai. mujhe lagta hai kahin koi heera hai to uski trash mein koi kasar na rah jaye.
    SAMVEDNA AUR ANUBHUTI AAPKI BAHUT GAHRI HAI. SHABD CHAYAN MEIN BHI KOI KAMI NAHIN. LEKIN AAPKI ABHVYAKTI SHABDMOH SE MUKT HONI CHAHIYE. JEEVAN HO YA KAVITA UNCHI UDAN KE LIYE VYARTH SE MUKT HONA PADTA HAI.
    aapki is kavita "tera nam kya hai prem" ka shabd chyan karte huee mujhee panktiyan likhni hoti to kuchh yun hotin. yeh main isliey nahin likh raha ki main koi aapse shrsth hoon. balki mere pas to kalpna ka khana hi khali hai. jo ki aapkey pas prachurta mein hai. lekin shilp ke star par jo kuchh bhi alp sa meri jankari mein hai aapse sanjha kar raha hoon. anyatha na lein.

    ACHANAK
    YE SUBAH
    NAYE SURAJ KE SANG
    MOUSAM KA AJANA SA RANG
    ABHOOJH YE AAHAT JAISEY..JINDGI

    RAJNIGANDHA SE MAHKTEY
    SHABD
    GULMOHAR KE RANGON MEIN RANGEE
    PLASH KI AAG SE
    CHHAA RAHEY TAN MAN PAR
    MOUN

    ISEY KYA NAM DOON !
    PREM !

    (ab aap meri madad karein. ek to is comment ko devnagri mein kaisey convert kiya jaye? doosra ek achha blog kaise baney?--dhanyvad ke sath.)

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  42. मैं क्या कहूं...आपने बहुत ही उम्दा रचना की है! जिसे कई बार पढने का मन हुआ!
    जारी रहें.
    ---


    हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

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  43. BHAI VIJAY JEE,AAPKEE IS KAVITA
    MEIN SHABDON AUR BHAVON MEIN NIKHAR
    HEE NIKHAR HAI.BHAVISHYA MEIN AAPSE
    BAHUT HEE AASHAAYEN HAIN.ISEE TARAH
    LIKHTE RAHIYE AUR MUN KO BHAATE R
    RAHIYE.SHUBH KAMNAYEN.

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  44. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....bahut shaandar rachana shabd man ko chhoote huye .

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  45. कविता इतनी अच्छी लगी कि फिर से पढ़ने चला आया । एक बार पुनः बधाई स्वीकारें । आभार

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  46. प्रेम की अद्भुत प्रस्तुति !! दिल को छू लेनेवाला अहसास
    वाकई काबिलेतारीफ है !
    बस इसी तरह लिख कर हमारा मार्गदर्शन करते रहिये
    आपका ही मुकेश पाण्डेय "चन्दन"

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  47. माफी चाहूँगा, आज आपकी रचना पर कोई कमेन्ट नहीं, सिर्फ एक निवेदन करने आया हूँ. आशा है, हालात को समझेंगे. ब्लागिंग को बचाने के लिए कृपया इस मुहिम में सहयोग दें.
    क्या ब्लागिंग को बचाने के लिए कानून का सहारा लेना होगा?

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  48. बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति है.
    ये कैसे नए अहसास हैं
    मौन के भी शब्द होते हैं
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो
    यदि प्रेम में पवित्रता, गहरायी, तल्लीनता और सच्चाई हो तो मौन के शब्द ध्वनि से कहीं अधिक असर करते हैं. टेलीपेथी की तरह काम करते हैं.
    कविता लाजवाब है.
    पलाश के आग के संग
    गुलमोहर के हो बहुत से रंग
    और हो रजनीगंधा की गंध
    जो छा रही है मन पर
    और तेरे नाम के संग
    प्रकृति और भावों का सुन्दर सामंजस्य है.
    बधाई.

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  49. इतने गुरूजनों की तारीफ़ के बाद तो कुछ कहने को शेष ही नहीं बचता विजय जी....प्रेम के निश्चल अहसासों में डूबी ये कविता विजय-लेखनी का जादू समेटे हुये है...

    सुंदर !

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  50. अभिव्यक्ति की परिभाषा ...मौन के संग ....पलाश के रंग ....
    बहुत सुन्दर रचना ...!!

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  51. तेरा नाम क्या है मेरे प्रेम ?

    इस प्रश्न का जवाब कितने मनीषियों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों साहित्यकारों ने तलाशने की कोशिश की है मगर इसका अर्थ तो वही हृदय जानता है जो इसमे बस डूबने वाला है..मगर उसके पास फिर शब्द कहाँ..और फिर यह खूबसूरत अहसास
    ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....
    पूरी कविता एक खूबसूरत कैन्वस सी बन गयी है जिसमे हर रंग दूसरे को मात देता मालुम होता है..
    पलाश की आग के संग ...
    गुलमोहर के हो बहुत से रंग
    और हो रजनीगंधा की गंध
    जो छा रही है मन पर
    और तन पर
    बधाई

    ReplyDelete
  52. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

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  53. adbhut bhav ahsaas aur labzo ka sangam hai.
    Really amazing

    http://devendrakhare.blogspot.com

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  54. इन मौन के अहसासों से तो हर कोई गुजरता है पर इतनी खूबसूरती से अपने मौन को शब्द नहीं दे पाता कोई ...बेहतरीन रचना

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  55. गहरे अहसास से उपजी है कविता . बधाई.

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  56. बहुत सुन्दर दिल को छू लेने वाली रचना . बधाई .

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  57. Iss Pyaar ko main kya naam doon....?

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  58. सच ही इतने दिग्गजों की टिप्पणियों के बाद मेरे लिये कुछ कहना सूरज को आइना दिखाना है पर फिर भी
    प्रेम के अहसास की बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ती है ये ।
    खास कर मौन के भी शब्द वाली बात दिल को भा गई ।

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  59. मौन ही प्रेम की सबसे बेहतर परिभाषा है जो नाम आपने दिए हैं प्रेम को ...बहुत खूबसूरत हैं ...

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  60. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....


    अच्छी अभिव्यक्ति....भाव ने काफी आकर्षित किया साधू!!

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  61. recd. by email from Mr.Ramesh Vaidya..

    Dear Vijay,


    very nice peom.

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  62. recd. by email from Mr.Shekhar Sony...

    wah wah kya bat hai

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  63. recd. by email from Mr. Kamal Sharma...

    कविताएं देखकर ही लग रहा है आपका हौसला काफी ऊंचा है। हौसले के साथ साथ प्रोफेशनल हो जाइए।

    कमल

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  64. recd. by email from Ms.Punita Thakur ..

    Vijay ji ,
    Naman !
    Aapaki rachana beshk prabhavit aur prerit karti hai.blog par pratikriya na de pane k liye khed hai.
    punita

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  65. प्यार को प्यार कहो, तुम उसे कोई नाम न दो।
    ----------
    डिस्कस लगाएं, सुरक्षित कमेंट पाएँ

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  66. ये कैसे नए अहसास हैं
    मौन के भी शब्द होते हैं
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो

    ..बहुत खूबसरत अहसास और उससे भी सुंदर उनकी अभिव्यक्ति

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  67. आपको और आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  68. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .
    कितना सुखदाई है ये मौन, जो मौन हो कर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा गया
    आप के ब्लॉग तक पहुचने में मुझे वक्त लगा पर अब ये सिलसिला जारी रहेगा
    आभार

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  69. ek dum naye ehsaas ke saath likhi gayi hai yeh khoobsoorat kavita.......


    dil ko chhoo gayi.........

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  70. ये कैसे नये अहसास है
    मौन के भी शब्द होतें है
    क्या तुम उन्हें सुन रही हो .....

    :) :) :)

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  71. बहुत मासूम सा है आपका यह सवाल। इसपर प्रेम ही क्या नफरत भी फिदा हो जाए।

    ------------------
    और अब दो स्क्रीन वाले लैपटॉप।
    एक आसान सी पहेली-बूझ सकें तो बूझें।

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  72. जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं....!

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  73. विजय कुमार सप्पत्ति जी .... जन्मदिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ .....

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  74. रंगों की खुशबू और खुशबू के रंग, बस. कुछ कविता से और फिर अब 76 comments पढ़ लेने के बाद निःशब्‍द हूं.

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