Saturday, August 1, 2009

सपना

आदरणीय समीर लाल जी . This poem is dedicated to you. इस नज़्म का backdrop जबलपुर शहर है ,जहाँ मैं कुछ महीनो पहले गया था. वहां Bhedaghat में बहती नर्मदा नदी और marble rocks ने मुझे ये नज़्म लिखने की प्रेरणा दी. मैं ये नज़्म सारे जबलपुर वासियों और वहां के कवि तथा अन्य रचनाकारों को समर्पित करता हूँ ...


सपना

बहुत दिन बीते ... खुदा ने सोचा कि,
कुछ खुशियाँ इकठ्ठी की जाएँ ;
और दुनिया के बन्दों को बांटा जाएँ ....

खुदा को तलाश थी उन बन्दों की ,
जो थक चुके थे अपने जीवन से
और सोचते थे कि;
ये जीवन अब यूँ ही बीतेंगा ...

खुदा ने ढूँढा तो पाया ,
कि, हर बन्दा कुछ यूँ ही था ..
वो बड़ा परेशान हुआ ..
उसकी दुनिया शायद जीने लायक नहीं थी ..
खराब हो चुकी थी ..

उसने एक शहर बनाया
और उसमे बहती एक नदी बनायीं ..
उस नदी के चारो ओर
ऊंचे ऊंचे संगमरमर के पर्वत बनाये ...
और चांदनी रातो में ;
बिखरती प्यार की रौशनी बनायी !!
और वहां एक सपना भी बनाया ....
प्रेम से भरा हुआ ..
जीवन से आनंदित ...
और खुशियों से मुदित ....!!!

खुदा को इन्तजार था अपने उन बन्दों का;
जिन्होंने जीवन को सब कुछ दिया था
पर जीवन ने उन्हें कुछ नहीं दिया था ..

खुदा को इन्तजार करना पड़ा ..
बहुत लम्बा ...
बहुत ज्यादा देर तक ..
दिन पर दिन बीतते गए..
बरसों को पंख लग गए थे ...
यूँ ही कई जनम बीत गए थे...
खुदा थकने लग गया था ..
वो अब बुढा हो चूका था ..

फिर एक करिश्मा हुआ
खुदा भी हैरान था ..
किसी खुदाई ने उस पर भी रहम किया था ...
उसके बनाये दो बन्दे ...
जो कई जनम दूर थे एक दूजे से
उसी शहर में मिलने आ रहे थे...

दोनों कुछ इस तरह जी रहे थे ;
अपने अपने देश में ....
कि ज़िन्दगी ने भी सोचा ..
अल्लाह इन पर रहम करें..
क्योंकि वो रात दिन ..
नकली हंसी हंसते थे और नकली जीवन जीते थे..
ज़िन्दगी ने सोचा ,
एक बार कुछ असली रंग भर दे..
इनके जीवन में...!!!

और ..बस किसी सपने की कशिश में बंधकर दोनों
उसी शहर में पहुंचे ....
जहाँ खुदा ने वो सपना सजाया था
बस एक बार वो मिले ,
फिर उन दोनों को हाथ थामकर खुदा
उन्हें उस नदी के किनारे ले गया ..
और अपने बनाये हुए सपने में ,
उन्हें जीने का एक मौका दिया .......

सपना ...बस इतना हसीन था कि
दोनों की नींद ख़तम नहीं होती थी ..
दोनों ने सपने में दुनिया जहान को देख लिया ...

सब कुछ किसी पिछलें जनम की बात सी थी ..
दोनों कहीं से भी अजनबी नहीं थे ..
बस यूँ लग रहा था कि एक दूजे के लिए ही थे..
सपना बस पंख लगाकर उढ़ गया...

जब नींद खुली तो ;
देखा दोनों अपनी दुनिया में वापस जा चुके थे
लेकिन उस सपने की खुशबू अब तक महक रही थी ..

मैं तो अब भी वही हूँ ;
तेरे साथ...वही चाँद , वही नदी और वही रात ......
जानाँ , क्या तुम उस सपने को भूल सकी हो .....!!!

31 comments:

  1. खुदा का यह तोहफा बंदगी के लायक ही है,और आपके शब्दों में एक प्रार्थना,शुक्रिया सबकुछ है...

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  2. वाह खुदा की तारीफ़ बहुत सुंदर की है आपने....
    सच में खुदा ने हमारे लिए क्या क्या नहीं किया है... बहुत सुंदर... आप ने जो नज्म लिखी है वो बहुत अच्छी लगी मुझको...
    मीत

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  3. बहुत ही सुन्‍दर रचना खुदा की नायाब देन है बधाई ।

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  4. khuda ka sapna...........waah! aapne to khuda ko bhi sapna dekhne par majboor kar diya...............kya khoob likha hai .........kitni gahri soch ke sath.

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  5. निश्चित ही संस्कारधानी जबलपुर एक स्वप्न नगरी है जिसे खुदा कहो या ईश्वर, ने अपने हाथों से बहुत जतन से गढ़ा है. आपने उसकी इस सुन्दर अनुपम कृति को उतने ही जतन से शब्द दिये.

    देखिये, कितनी सुन्दर नज़्म तैयार हुई है बिल्कुल माँ नर्मदा सी शीतल, कलकल, अपना अविरल प्रवाह लिए, चाँदनी रात में संगमरमरी खूबसूरत वादियों के बीच बहती हुई.

    आपने इस रचना को मुझे समर्पित कर मुझे कृतज्ञ किया और मैं और समस्त जबलपुरवासी आपके आभारी है.

    कोटिशः आभार.

    इस रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

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  6. वाह विजय जी क्या बात है। एक डोर बंधी हुई आखिर तक चलती चली गई। और जिज्ञासा अंत तक बनी रही। सुन्दर शब्द अपनी सुन्दरता बिखेरते रहे। आनंद आया जी।

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  7. समीर जी का नाम तो कंही कविता में आया ही नहीं चलो मैं जोड़ देता हूँ ;

    जब नींद खुली तो देखा;
    समीर जी,
    कनाडाई हो गए थे...
    जबलपुर में खिले फूल,
    क्युवेक प्रांत की ठण्ड में,
    कहीं खो गए थे.. ...
    आखिर में उनका ब्लॉग काम आया
    चिट्ठाजगत फिर से ढूंढ लाया !!!!!

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  8. kya kahne
    kya kahne jabalpur ke ....
    main toh jab bhi sivni,patan ya jabalpur, katni ya satna jata hoon bina kisi kaam k bhi ek din zaroor jabalpur me guzarta hoon

    sachmuch maalik ne kuchh vishesh saamagri se banaya hai jabalpur !
    jai ho !

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  9. वाह.. जबलपुर की समर्पित, समीर जी के नाम लिखी लाजवाब रचना है विजय जी.............. प्राकृति के सुन्दर नज़रों को ईश्वरीय तरीके रखा है आपने.....

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  10. सुन्दर!मै भी पिछले सोमवार को जबलपुर गया था सालों बाद्।

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  11. लाजवाब रचना है सपना

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  12. ek lajaab pesh kash aapki
    bahut sunder rachna
    jabalpur waqayi bahut achhi city hai

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  13. waaqai mein bahut hi badhiya bhaav hain..... aur jabalpur ki to baat hi alag hai........ khaaskar bhedaghat ki........

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  14. जबलपूर और नर्मदा अद्भुत मेल है । और भेडाघाट की सुंदरता तो शहर को और भी सुंदर बना देती है । आपकी कविता सुंदर भाव लिये इसको दिखाती है ।

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  15. recd by email from Ms.Rajani....

    bahut acchi poem hai.
    dil ko chuley aisi.

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  16. recd by email from Mr. Surendra ......

    'सपना' सुन्दर है...!

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  17. गजब रुमान है कविता में !

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  18. bahut sundar rachanaa hai.ek praathanaa ki tarah.

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  19. विजय जी बहुत कुछ कहना चाहता था आपकी इस रचना पर लेकिन अभी सिर्फ इतना ही कहूँगा की आपकी ये रचना बहुत भावुकता लिए हुए है...
    नीरज

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  20. बहुत सुन्दर अन्त तक इस कविता ने बान्धे् रखा आपके सप्नों मे और सपनों के शहर मे खुदा ने जो रंग भरा है वो बना रहे शुभकामनायें और आभार्

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  21. बहुत सुन्दर अन्त तक इस कविता ने बान्धे् रखा आपके सप्नों मे और सपनों के शहर मे खुदा ने जो रंग भरा है वो बना रहे शुभकामनायें और आभार्

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  22. उसने एक शहर बनाया
    और उसमे बहती एक नदी बनायीं ..
    उस नदी के चारो ओर
    ऊंचे ऊंचे संगमरमर के पर्वत बनाये ...
    और चांदनी रातो में ;बिखरती प्यार की रौशनी बनायी !!

    Sundar bhav va shabdawali !!

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  23. Fantastic Dear, Aapki kavita me woh raas hai ki insaan us me kho jaata hai..

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  24. vijay ji aapki kavitayen bahut sunder hain .. madhur bhawon se labrez hain.. bus itana kahana hai aapse ki kala rang back ground se hata den padhane men bahut dikkat ho rahi hai.

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  25. vijay ji aapki kavitayen bahut sunder hain .. madhur bhawon se labrez hain.. bus itana kahana hai aapse ki kala rang back ground se hata den padhane men bahut dikkat ho rahi hai.

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  26. Bhavon ko bade achche tareeqe se abhivyakt kiya gaya hai!

    RC

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  27. bahut khoobsoarta kaha hai aapne ....
    khuda ke banaye ye nazare hamare man ko jaise chote hai use shabdo mein baya kerna aasan na hai......

    jald hi maine bheraghat ke snap dekhe .......bahut khoobsorat jagah hai..

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