Wednesday, August 8, 2012

आंसू



उस दिन जब मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ा ,
तो तुमने कहा..... नही..
और चंद आंसू जो तुम्हारी आँखों से गिरे..
उन्होंने भी कुछ नही कहा... न तो नही ... न तो हाँ ..
अगर आंसुओं कि जुबान होती तो ..
सच झूठ का पता चल जाता ..
जिंदगी बड़ी है .. या प्यार ..
इसका फैसला हो जाता...

13 comments:

  1. वाह... बहुत सुन्दर...काश आंसू कह सकते...

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  2. बहुत सुन्दर रचना...

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  3. अगर आंसुओं कि जुबान होती तो ..
    सच झूठ का पता चल जाता ..
    जिंदगी बड़ी है .. या प्यार ..
    इसका फैसला हो जाता...

    आपकी इस कविता के जवाब मे कुछ भाव उभर आये हैं वो लिख रही हूँ …………

    उफ़ …………कब तक पढोगे
    बेजुबानों की भाषा
    पता है कुछ लिपियाँ ऐसी हो्ती हैं
    जिन्हें पढने के लिये
    खुद को मूक बनाना पडता है
    और पीडा की इम्तिहाँ से
    गुजरना पडता है
    क्या दे सकोगे इम्तिहान
    खामोश मोहब्बत का
    जानते हो
    इन इम्तिहानों के रिज़ल्ट नही निकला करते
    और तुम जानना चाहते हो आंसुओं की भाषा
    जो ना देवनागरी है ना ब्रेल ……………

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  4. आह!!!
    बहुत सुन्दर!!!
    आंसुओं की भाषा कोई समझ पाता तो ये बहते क्यूँ????

    अनु

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  5. बहुत सुन्दर ,,
    भावपूर्ण रचना...

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  6. आखों के आँसू शब्द लिये आते हैं..

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  7. Chhot-si lekin badee hee sundar rachana!

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  8. बहुत अच्छी भावाव्यक्ति , बधाई

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  9. वाह ..निशब्द करते भाव

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