Subscribe to:
Post Comments (Atom)
एक अधूरी [ पूर्ण ] कविता
घर परिवार अब कहाँ रह गए है , अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है अब तो सिर्फ \बस सिर्फ...
-
घर परिवार अब कहाँ रह गए है , अब तो बस मकान और लोग बचे रहे है बाकी रिश्ते नाते अब कहाँ रह गए है अब तो सिर्फ \बस सिर्फ...
-
फूल,चाय और बारिश का पानी बहुत दिनों के बाद , हम मिले... हमें मिलना ही था , प्रारब्ध का लेखा ही कुछ ऐसा था . मिलना , जुदा होना औ...
माँ को नमन ..!
ReplyDeleteअंतर को उद्वेलित कर देती है यह कविता .लेकिन एक विवशता हर बार होती है नई पीढ़ी के साथ,कि वह वह उस सीमित घेरे से बाहर निकल एक बड़ा संसार अपनी संतानों को देना चाहती है.
ReplyDeleteमाँ बिना सारा संसार ही सुना सा लगता है ....
ReplyDeleteमार्मिक रचना
माँ तो माँ होती है।
ReplyDeleteदिल भर आया......................
ReplyDeleteसहसा कितने उजाले स्याह हो गये होंगे, यह सुनकर..
ReplyDeleteमनभावन पोस्ट.... हे माँ तुझे प्रणाम ...
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.
ReplyDeleteमाँ है मंदिर मां तीर्थयात्रा है,
माँ प्रार्थना है, माँ भगवान है,
उसके बिना हम बिना माली के बगीचा हैं!
संतप्रवर श्री चन्द्रप्रभ जी
आपको मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
मेरी मां क्या मर गई...
ReplyDeleteमुझे लगा मेरा पूरा गाँव मर गया....
मेरा हर कोई मर गया ..
मैं ही मर गया .....
व्यथित कर देने वाली कविता है विजय जी. कविता कम आपके उद्गार ज़्यादा..नमन.
सचमुच माँ हमेँ ईश्वर की सर्वोत्तम देन है।
ReplyDeleteबहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
इंडिया दर्पण की ओर से मातृदिवस की शुभकामनाएँ।
बहुत भावपूर्ण. दिल को छूकर नाम कर गयी आपकी यह कविता.
ReplyDeleteमातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
आँखो को नम करती पंक्तियाँ ! बधाई !
ReplyDeleteसुन्दर गम्भीर रचना...बहुत बहुत बधाई...
ReplyDeleteदिल को छू गई आपकी ये रचना .....
ReplyDeleteओह!! मार्मिक...अपने मन से निकले शब्द और बात!
ReplyDeleteमाँ की पुण्य स्मृति को नमन!!
ReplyDeleteye sab ehsaas kash taar milne se pahle jage hote.
ReplyDeleteक्या सच में विजय जी ....?
ReplyDeleteआजकल तो तार आता ही नहीं ......
हरकीरत जी ;
Deleteनमस्कार .
ये किस तरह का कमेन्ट है . क्या आपको कविता के भाव नहीं समझे या अपने कवियत्री होने का अभिमान हो गया है .
" माँ " कविता का काल १९६० के आसपास का है .. तब क्या लोगो के पास Samsung galaxy mobile था ? उस वक़्त तार ही होता था .
आपसे तो ये उम्मीद नहीं थी , हर वक़्त हंसी ठिठोली ठीक नहीं है . अगर ऐसा ही कोई कमेन्ट कोई और आपकी कविता पर देवे तो आप बवाल मचा देती है .
अपना ख्याल रखे .
धन्यवाद.
विजय