Monday, April 18, 2011

वक्त वक्त की बात


 
तुझसे रिश्ता जोड़ते हुए कोई मुश्किल नहीं हुई थी
बस वक्त ठहर सा गया था .
नब्ज़ रुक सी गयी थी
सांस थम सी गयी थी

लेकिन समय के पाँव , सुना है कभी नहीं रुकते ;
जिन्हें हम मंजिल समझते है ,वो अक्सर रास्तो के पत्थर होते है
जिसे शुरुवात समझते है , वो एक अंत की शुरुवात ही होती है

सो , जिंदगी कभी दिन पर पाँव रखते हुए
और कभी रात पर रुकते हुए
आज इस मोड पर आ गयी है ,
जहाँ से तुम ; मेरे हाथ से अपना हाथ निकाल रही हो ..

लेकिन बड़ी अजीब सी बात है ,
अजीब सा हादसा है .
आज रिश्ता खत्म करते हुए ….

फिर वक्त ठहर सा गया है ,
फिर नब्ज़ रुक सी गयी है
फिर सांस भी थम सी गयी है ..

वक्त वक्त की बात है जाना ,
तुम कल आकर देखना ,
मेरी लाश में तुम्हे ;
तेरे नाम का दिल धडकते हुए मिलेंगा !!


20 comments:

  1. Bahut anoothee rachana!Ek kasak chhod gayee dil me!

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  2. शानदार, बधाई.
    मेरे ब्लॉग पर आयें, आपका हार्दिक स्वागत है
    मीडिया की दशा और दिशा पर आंसू बहाएं

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  3. वक्त वक्त की बात है जाना ,तुम कल आकर देखना , मेरी लाश में तुम्हे ;तेरे नाम का दिल धडकते हुए मिलेंगा !!
    क्या बात हे बहुत खुब्सुरत भावो से आप ने दिल का दर्द को दर्शाया हे, धन्यवाद

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  4. वक्त वक्त की बात है जाना ,तुम कल आकर देखना , मेरी लाश में तुम्हे ;तेरे नाम का दिल धडकते हुए मिलेंगा !!

    बहुत खूब विजय जी ......

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  5. मन की पीड़ा के प्रतीकों को व्यक्त करने का नया प्रयोग। बहुत ही सुन्दर।

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  6. ठहरे हुए वक़्त के हाथों में हर अहसास भी ठहर जाता है जो वक्क्त-बेवक्त इतनी खूबसूरती से बाहर आ जाता है साथ ही हमें भी कुछ पल ठहरा देता है . चित्ताकर्षक लगी ..बधाई

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  7. सुंदर कविता!
    मृत्यु में भी जीवन तलाशने की कोशिश, बधाई!

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  8. रचना अच्छी लगी शुभकामनायें आपको !!

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  9. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (21-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  10. बहुत खूब ... दर्द और कसक की लहर दौड़ जाती है अंत आते आते .... बहुत खूब विजय जी ...

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  11. बहुत मार्मिक प्रस्तुति

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  12. vijay bhai bahut sundar bhavapoorn rachana ...abhaar prastuti ke liye ..

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  13. bahut achchi rachna , seedhe saral andaz me. shubhkamnayen.

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  14. दिल का धडकना ही
    ज़िन्दा रहने का सबब बना
    जुदाई का गम ही
    जीने की वजह बना

    बेहद खूबसूरती से बयाँ किया है हाल-ए-दिल्……………एक दास्तान बन गयी।

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  15. सच में वक़्त वक़्त की बात होती...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति, बधाई विजय जी.

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  16. अंतस के दर्द का अहसास बखूबी बयान किया है...

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  17. दिल का दर्द लफ्जों में उतर आया है । बेहद खूबसूरत रचना ।

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