Sunday, April 24, 2011

परायों के घर



कल रात दिल के दरवाजे पर दस्तक हुई;
सपनो की आंखो से देखा तो,
तुम थी .....!!!

मुझसे मेरी नज्में मांग रही थी,
उन नज्मों को, जिन्हें संभाल रखा था,
मैंने तुम्हारे लिये ;
एक उम्र भर के लिये ...!

आज कही खो गई थी,
वक्त के धूल भरे रास्तों में ;
शायद उन्ही रास्तों में ;
जिन पर चल कर तुम यहाँ आई हो .......!!

लेकिन ;
क्या किसी ने तुम्हे बताया नहीं ;
कि,
परायों के घर भीगी आंखों से नहीं जाते........!!!
 

32 comments:

  1. प्रेम में भी आँखे भींग जाती है.सुन्दर रचना

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  2. Kaun jaane k apna samjha ya paraya>?

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  3. अंतिम पंक्ति तो मन को चोट कर रही है.... अच्छी रचना.....

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  4. बहुत बढ़िया भावपूर्ण रचना ...

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  5. parayon ke ghar bheegi aankhon se nahi jate...kya khoob...

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  6. जब अपना हृदय ही पराया हो जाये तब कहाँ जाये कोई?

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  7. सही कहा आपने और अपनी बात कहने के इस अंदाज़ को सलाम ......
    अक्षय-मन

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  8. BHAAVPOORN KAVITA KE LIYE BADHAAEE
    AUR SHUBH KAMNA .

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  9. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (25-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  10. बेहद खूबसूरत कविता।

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  11. बहुत सुंदर कविता धन्यवाद

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  12. क्या किसी ने तुम्हे बताया नहीं ;
    कि,
    परायों के घर भीगी आंखों से नहीं जाते........!!!

    क्या कहने इन पंक्तियों के ...बहुत गहरे भाव .....आपका आभार

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  13. बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति.

    परायों के घर भीगी आँखों से नहीं जाते.

    क्या खूब कहा है. बधाई.

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  14. परायों के घर भीगी आँखों से नहीं जाते ...
    बहुत गहरी बात ...

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  15. क्या किसी ने तुम्हे बताया नहीं ;
    कि,
    परायों के घर भीगी आंखों से नहीं जाते........!!!....

    very nice..touching

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  16. बहुत सुंदर कविता

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  17. लेकिन ;
    क्या किसी ने तुम्हे बताया नहीं ;
    कि,
    परायों के घर भीगी आंखों से नहीं जाते........!!!

    दिल को छू गयी ये पंक्तियाँ..बहुत लाज़वाब रचना..

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  18. अंतिम पंक्ति तो मन को चोट कर रही है.... अच्छी रचना.....

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  19. क्या खूब कहा है, परायों के घर भीगी आँखों से नहीं जाते|बहुत सुन्दर रचना|

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  20. bahut sundar vijay ..antim panktiyan lajwab...

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  21. परायों के घे
    भीगी आँखों से नहीं जाते....... !

    प्रेम भाव में भीगे हुए
    बहुत ही मन भावन शब्दों का काव्य रूप
    हर पढने वाले को
    सम्मोहित कर रहा है ...
    नज़्म में विजय सप्प्त्ती का जादू खुद बोल रहा है .
    बधाई .

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  22. बहुत सुंदर सप्पती जी । पर मांगते तो अपनों से ही है न ।

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  23. आँखों को नाम कर देने वाली अद्भुत पंक्तियाँ हैं.

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  24. परायों के घर ...
    बेहद संवेदनशील रचना, एक भावुक कविह्रदय द्वारा ...
    शुभकामनायें !

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  25. कोमल भावों की बहुत खूबसूरत कविता...
    हार्दिक बधाई.

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  26. क्या कहूँ कुछ समझ नही आ रहा……………शब्दो ने दामन छोड दिया आज्…………कभी कभी ऐसा होता है कुछ पढकर कि दिल मे उतरता है मगर शब्दो मे बयाँ नही हो पाता और आज ऐसा ही हुआ है।

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  27. Dear Satpatti Ji
    aapki kavita padkar man ko bahut shukun mila hai

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