Monday, February 9, 2009

लव लेटर बनाम नेता चीटर


दोस्तों , मैं एक हास्य-व्यंग्य रचना पेश कर रहा हूँ ..आपकी खिदमत में !!...मुझे उम्मीद है कि आपको पसंद आयेंगी.... जो मुझसे मिले है /जानते है ,उन्हें पता है कि music मेरी first life line है ,और comedy मेरी second life line... usually मैं खामोश ही रहता हूँ , लेकिन जब group में रहता हूँ तो हँसना और हँसाना मेरी फितरत बन जाती है ... इस कविता को अगर आप पसंद करेंगे तो मैं हर महीने दो-तीन हास्य रचनाएं जरुर लिखूंगा ..इस कविता का शीर्षक ,आदरणीय श्री अविनाश जी ने दिया है ....वो एक बेहतरीन हास्य-व्यंग्य लेखक है .. मैंने इस segment के लिए उन्हें अपना गुरु बना लिया है [ ब्लॉगर जगत के कई उस्तादों को अपना गुरु मान लिया है ,,इन सबका आशीर्वाद और प्यार मिलेंगा तो मेरा कल्याण जरुर होंगा ].....कविता को पढिये ...मुस्करिये...हंसिये...और मुझे अपना स्नेह और प्यार दीजियेगा ......हमेशा की तरह......




लव लेटर बनाम नेता चीटर

लिख रहा हूं मैं आज एक लव लैटर ,
अपनी बैठक रूपी गुफा में लेटकर ;
आ गई मेरी बीवी ,चौके से दौड़कर ;
जाने उसे कैसे हो गई इसकी ख़बर !

मुंह फाड़कर गुराई मुझ पर ,

फिर तुम कुछ लिख रहे हो ;
मेरे बाप की गाढ़ी कमाई यों ही उडा रहे हो !
कौन सी किताब से कविता चुरा रहे हो ;
और अपनी कह , उसे , अपना नाम जमा रहे हो !!

सुनकर मैं ये सब बिल्ली बन भीग गया ;
डरते हुए उससे दास्ताँ सारी कह गया ;
प्रिये, तुम्‍हें अपने पति पर फख्र होना चाहिए ;
विकट मुश्किल में सदा मेरा साथ देना चाहिए !

प्रेमिका अपने प्रेमी से नाराज़ है ;
उसका प्रेमी निकम्‍मा और बेजार है ;
प्रेमिका को प्रेमी लग रहा कचरा है ;
कविताओं से भर गई सारी कचरापेटी है ;
प्रेमिका उसी कचरापेटी के पास लेटी है ;
और ......
वो प्रेमिका कौन है ,
बात मेरी काट कर
जोर से चिल्ला कर
मेरी प्यारी बीवी ने आसमान सिर पर उठाया !
भौचक्का रह गया मैं
उसने सही था अंदाजा लगाया !!

मेरी बीवी नेता बन बकती रही
और मैं पब्लिक बन सुनता रहा !

वो चली गई ;
मुझे सब कुछ कह गई ;
कुछ गुस्से में , कुछ जल कर और बाकी भुनकर !!

मैं फिर लिखने लगा लव लैटर
बेशर्म नेताओं की तरह फिर दोबारा लेट कर ;
मैं लिखने लगा लव लैटर !!!!

18 comments:

  1. भाई गुरु मान गए ...आपका लव लैटर तो पसंद आया ...काफ़ी रोचक था ...तो भाभी जी के हाथों मार तो नही खानी पड़ी इसके बाद :) :)


    अनिल कान्त
    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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  2. लव लेटर से अधिक धाँसू तो आपने अपनी फोटो लगा रखी है...पत्नी से डांट खाने के बाद क्या इंसान इतना स्मार्ट हो जाता है?
    नीरज

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  3. Hi Vijay,

    Your picture, your subject and the title, they al complement each other!!! I guess you have become thick skin guy who doesnt care what others are telling abt you:-).. Very gud sense of humour!!

    Keep it up!

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  4. हा हा हा। बहुत खूब। आप तो इस विधा में भी माहिर निकले जी। कमाल है। वैसे नीरज जी की बात को आगे बढाते हुए यही कहूँगा कि क्या डांट खाने के बाद पति हीरो हो जाता है? सच हीरो लग रहे हो।

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  5. अच्छी रचना विजय जी...........हास्य के साथ साथ व्यंग का भी भरपूर मसाला है इस में

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  6. DIGAMBAR JI NE SAHI KAHA HAI SAHYA KE SATH ME BYANGA KA MASALA BHAR PUR HAI BAHOT HAI BADHIYA LIKHA HAI MAGAR BHABHI JAAN SE DAT KHANE KE BAAD SMART HO JATA HAI KOI ? NEERAJ JI KE IS SALAH ME TO FIR MUJHE BHI SHADI KARNI PADEGI...
    BAHOT HI SUNDAR HASYAKAVITA LIKHA HAI IS LEKHAN VIDHA ME BHI AAP MAHIR HAI YE TO PATA HI NAHI THA .. DHERO BADHAI AAPKO SAHAB...


    ARSH

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  7. बहुत अच्छा लगा पढ़कर, शुभकामनाएँ

    ---
    गुलाबी कोंपलें

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  8. बहुत बढ़िया लिखा है आपने यह :)

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  9. ;
    और ......
    वो प्रेमिका कौन है ,
    बात मेरी काट कर
    जोर से चिल्ला कर
    मेरी प्यारी बीबी ने फरमाया !
    भौचक्का रह गया मैं ,क्योंकि
    क्या सही था उसने अंदाजा लगाया !!
    " ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha very well expressed......really enjoyed reading it.."

    Regards

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  10. प्यार में हुए शहीदों को हमारा प्रणाम ....ख़त लिखते रहे...

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  11. achchi kavita ke liye badhayi sweekarein...........bahut achcha hasya aur vyangya hai.

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  12. ha ha ha ha ha ha ......
    huzoor, pehle achhi tarah hans to loooN....achha vyang diya hai...
    aur aapko fakhr hona chahiye k aapne apne aadarneey guruji
    Sh Avinashji ka naam ooncha kr diya hai apni iss haasya kavita se.
    yooN hi likhte rahiye latekar aur hamaari bhaabishri ki pyari-pyari daant bhi grahan karte rahiye.
    badhaaee.....
    ---MUFLIS---

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  13. हास्य व्यंग तो गुदगुदाता ही है साथ में नज़रें उठकर सामने दरवाजे पर भी चली जाती हैं.

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  14. अन्तिम पंक्तियों ने हास्य को व्यंग्य में बदल दिया है.साधुवाद.

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  15. mazaa a gayaa sahab.....

    saath me netaa ji ki bhi tang kheench di....

    letkar......

    haa.haa......ha...ha.......

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  16. नेताई में नहीं होती सिर्फ मिलाई

    कवि करते हैं शब्‍दों से खूब ठुकाई

    फूट न रही हो किसी की रूलाई

    कविता सुनकर सिर्फ हंसी आई


    पर दे‍खना दूर एक नेता रो रहा है

    जिसने लिखा है चैन से सो रहा है

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  17. bahut acha laga ye roop bhi apki kavita ka...

    aksar to meien apki ahsaas bhari kuch kahti chup si rahti rekhachitra rachnaye hi apdi hai..lekina aj ye naya roop bhi bhaya

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