दोस्तों ; मेरे दो बच्चे है . मेरी बेटी मधुरिमा [ हनी ] ;12 बरस की है और मेरा बेटा तुषार [ वासु ] ; 7 बरस का है ! बच्चे तो मुझे बहुत प्यारे है और in fact ; मुझे सारे ही बच्चो से बहुत प्यार है ..पता नहीं , मुझे बच्चो में हमेशा ही भगवान दिखाई देते है .. बच्चो पर कविता लिखना मुझे हमेशा ही अच्छा लगता है ! मैंने बच्चो पर बहुत कुछ लिखा है .. Recently मैंने सुशील जी की बेटी नैना और नीरज जी की पोती मिष्टी पर भी कवितायेँ लिखी है ! [ अगर किसी मित्र को अपने छोटे बच्चे पर कोई कविता लिखवाना है तो मुझे कहियेगा , मैं जरुर लिख दूंगा ]...ये कविता मैंने मेरी बेटी के लिए लिखा है, लेकिन ये दुनिया की हर बेटी के लिए है ...बेटी है तो घर में खुशियाँ है ..ये बेटी ही बाद में पत्नी , बहु, माँ, सास, नानी ,दादी बनती है और हर घर की दुनिया का एक guiding light बनती है ...हनी मेरे जीवन में बहुत महत्त्व रखती है ..मैंने हमेशा से चाहा था की मुझे पहले बेटी की प्राप्ति हो ..और तो और मैंने उसके जनम के पहले उसका नाम भी रखा दिया था ..हनी !..मेरी निजी जीवन में हनी का बहुत बड़ा महत्व है she is everything to me ! ये कविता ,एक पिता की छोटी सी भेंट है अपनी बेटी के लिए .......उसके बहुत से प्यार के बदले में... बेटियाँ तो बस सब कुछ होती है .. ! और हाँ ये कविता आपकी बेटियों के लिए भी है .. मेरा सलाम है दुनिया की सारी बेटियों को !!!
बिटिया
हनी , तुझे मैंने पल पल बढ़ते देखा है !
पर तू आज भी मेरी छोटी सी बिटिया है !!
आज तू बारह बरस की है ;
लेकिन वो छोटी सी मेरी लड़की ....
मुझे अब भी याद है !!!
वही जो मेरे कंधो पर बैठकर ,
चाकलेट खरीदने ;
सड़क पार जाती थी !
वही ,जो मेरे बड़ी सी उंगली को ,
अपने छोटे से हाथ में लेकर ;
ठुमकती हुई स्कूल जाती थी !
और वो भी जो रातों को मेरे छाती पर ;
लेटकर मुझे टुकर टुकर देखती थी !
और वो भी ,
जो चुपके से गमलों की मिटटी खाती थी !
और वो भी जो माँ की मार खाकर ,
मेरे पास रोते हुए आती थी ;
शिकायत का पिटारा लेकर !
और तेरी छोटी छोटी पायल ;
छम छम करते हुए तेरे छोटे छोटे पैर !!!
और वो तेरी छोटी छोटी उंगुलियों में शक्कर के दाने !
और क्या क्या ......
तेरा सारा बचपन बस अभी है , अभी नही है !!!
आज तू बारह बरस की है ;
लेकिन वो छोटी सी मेरी लड़की ....
मुझे अब भी याद है !
वो सारी लोरियां ,मुझे याद है ,
जो मैंने तेरे लिए लिखी थी ;
और तुझे गा गा कर सुनाता था , सुलाता था !
और वो अक्सर घर के दरवाजे पर खड़े होकर ,
तेरे स्कूल से आने की राह देखना ;
मुझे अब भी याद आता है !
और वो तुझे देवताओ की तरह सजाना ,
कृष्ण के बाद मैंने सिर्फ़ तुझे सजाया है ;
और हमेशा तुझे बड़ी सुन्दर पाया है !
तुझे मैंने हमेशा चाँद समझा है ….
पूर्णिमा का चाँद !!!
आज तू बारह बरस की है ,
और ,वो छोटी सी मेरी लड़की ;
अब बड़ी हो रही है !
एक दिन वो छोटी सी लड़की बड़ी हो जाएँगी ;
बाबुल का घर छोड़कर ,पिया के घर जाएँगी !!!
फिर मैं दरवाजे पर खड़ा हो कर ,
तेरी राह देखूंगा ;
तेरे बिना , मेरी होली कैसी , मेरी दिवाली कैसी !
तेरे बिना ; मेरा दशहरा कैसा ,मेरी ईद कैसी !
तू जब जाए ; तो एक वादा करती जाना ;
हर जनम मेरी बेटी बन कर मेरे घर आना ….
मेरी छोटी सी बिटिया ,
तू कल भी थी ,
आज भी है ,
कल भी रहेंगी ….
लेकिन तेरे बैगर मेरी ईद नही मनेगी ..
क्योंकि मेरे ईद का तू चाँद है !!!
हनी , तुझे मैंने पल पल बढ़ते देखा है !
पर तू आज भी मेरी छोटी सी बिटिया है !!
आज तू बारह बरस की है ;
लेकिन वो छोटी सी मेरी लड़की ....
मुझे अब भी याद है !!!
वही जो मेरे कंधो पर बैठकर ,
चाकलेट खरीदने ;
सड़क पार जाती थी !
वही ,जो मेरे बड़ी सी उंगली को ,
अपने छोटे से हाथ में लेकर ;
ठुमकती हुई स्कूल जाती थी !
और वो भी जो रातों को मेरे छाती पर ;
लेटकर मुझे टुकर टुकर देखती थी !
और वो भी ,
जो चुपके से गमलों की मिटटी खाती थी !
और वो भी जो माँ की मार खाकर ,
मेरे पास रोते हुए आती थी ;
शिकायत का पिटारा लेकर !
और तेरी छोटी छोटी पायल ;
छम छम करते हुए तेरे छोटे छोटे पैर !!!
और वो तेरी छोटी छोटी उंगुलियों में शक्कर के दाने !
और क्या क्या ......
तेरा सारा बचपन बस अभी है , अभी नही है !!!
आज तू बारह बरस की है ;
लेकिन वो छोटी सी मेरी लड़की ....
मुझे अब भी याद है !
वो सारी लोरियां ,मुझे याद है ,
जो मैंने तेरे लिए लिखी थी ;
और तुझे गा गा कर सुनाता था , सुलाता था !
और वो अक्सर घर के दरवाजे पर खड़े होकर ,
तेरे स्कूल से आने की राह देखना ;
मुझे अब भी याद आता है !
और वो तुझे देवताओ की तरह सजाना ,
कृष्ण के बाद मैंने सिर्फ़ तुझे सजाया है ;
और हमेशा तुझे बड़ी सुन्दर पाया है !
तुझे मैंने हमेशा चाँद समझा है ….
पूर्णिमा का चाँद !!!
आज तू बारह बरस की है ,
और ,वो छोटी सी मेरी लड़की ;
अब बड़ी हो रही है !
एक दिन वो छोटी सी लड़की बड़ी हो जाएँगी ;
बाबुल का घर छोड़कर ,पिया के घर जाएँगी !!!
फिर मैं दरवाजे पर खड़ा हो कर ,
तेरी राह देखूंगा ;
तेरे बिना , मेरी होली कैसी , मेरी दिवाली कैसी !
तेरे बिना ; मेरा दशहरा कैसा ,मेरी ईद कैसी !
तू जब जाए ; तो एक वादा करती जाना ;
हर जनम मेरी बेटी बन कर मेरे घर आना ….
मेरी छोटी सी बिटिया ,
तू कल भी थी ,
आज भी है ,
कल भी रहेंगी ….
लेकिन तेरे बैगर मेरी ईद नही मनेगी ..
क्योंकि मेरे ईद का तू चाँद है !!!
बिटिया को उपहार स्वरूप लिखी गयी रचना बहुत ही सुन्दर!
ReplyDelete---
चाँद, बादल और शाम
गुलाबी कोंपलें
KYA KAHUN VIJAY JI YE KAVITA PADHKE MAIN ROOAANSU SA HO GAYA ,MERI AANKHEN NAM HO GAI.. HALAKI MERI SHAADI NAHI HUI MAGAR EK BETI KI CHAHAT PE ITNI KHUBSURAT AUR MAASUM SI KAVITA, EK BAAP KA PURA HAK ADAA KIYA HAI AAPNE... GAMALE KI MITTI KHATI ... AAJ BHI AAPKO YAAD HAI.. WAAH JI WAAH... AAPKI BITIYA KO DHERO PYAR AUR AASHIRVAAD....
ReplyDeleteDHERO BADHAEE AAPKO..
ARSH
बेटियाँ बहुत प्यारी होती है आपने बहुत ही प्यारी भावना से इस पर लिखा है ...बहुत बहुत बधाई आपको इतनी सुन्दर कविता लिखने के लिए
ReplyDeleteachcha likha hamesha ki tarah
ReplyDelete"Jis ghar main tum khelthi thi..us ghar ki deewarein bhi ro padengi jab tum yeh ghar chod kar jaogi..
ReplyDelete" -- Bus Aisi hoti hain bateiyan...
ये बेटियाँ तो बाप का अरमान होती हैं.
ReplyDeleteये बेटियाँ हर बात में तूफान होती हैं.
ओ विजय तेरा काव्य पढ्कर मैं हुआ बैचेन.
इस दिल में भी बेटी के हित ललचान होती है.
सुंदर अभिव्यक्ति ।
ReplyDeleteहनी और तुषार की फोटो अच्छी लगी ।
ये बेटियाँ ही तो होती हैं जिन से घर आबाद रहता है
ReplyDeleteमेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
vijay ji
ReplyDeleteaapke bachche bahut hi pyare hain.
aapke beti ke prati pyar swabhavik hai jaisa ki har pita ka hota hai.koi bhi pita nhi chahta ki uske jigar ka tukda usse door ho.
aapke bhav kavita mein bahut gahre pragat ho rahe hain.
बहुत सुन्दर और ख़ूब बात लिखी है विजय भाई बिटिया के लिये। हमारे भी इसी तरह दो बच्चे हैं बड़ी बिटिया और एक ऊधमी छोटू । हा हा ।
ReplyDeletesneh se bhari sunder rachana.
ReplyDeleteप्यारी सी बच्ची के लिए बहुत ही प्यारी कविता कह डाली आपने साहब ,,,,,
ReplyDeleteमगर आपने ये सही नहीं किया,,,
सुशील जी की बेटी नैना.....
और नीरज जी की पोती मिष्टी वाली कविताएं भी तो पोस्ट करनी यही ना,,,,????
ये बात तो गलत है आपकी,,,,,
क्या उन की कविताएं ना पढ़वायेंगे ,,,,???
और ये भी आपने सही लिख दिया के यदि किसी को भी अपने बच्चे पर कविता लिखवानी हो तो आपसे कहे,,,,,
आपके इस नेक जज्बे को बधाई,,,,,
बच्ची को दिल से प्यार,,,,,
मनु,,,
इस दुनिया का कोई पिता अगर अपनी बेटी पर कविता लिखेगा तो ये सब ही लिखेगा जो आपने लिखा है....अतिसुन्दर और भावुक रचना...बेटियों जैसी ही...ये कविता सब पिताओं की और से अपनी बेटियों के लिए है...सच कहा आपने...
ReplyDeleteनीरज
वाह विजय जी दिल से निकली यह रचना हम सबका दिल जीत गई। सच बेटियाँ होती ही इतनी प्यारी है। पिछले संडे की बात मैं दोपहर सोने के लिए लेटा ही था कि नैना आ गई। चने लेकर मुझे देने, मैंने कहा बेटा मुझे नींद आ रही बाद में खाऊँगा। और बेटा मुझे सोने दो थोडी देर पर वह बोली नही अभी खाओ। मैंने कहा कि रख दो मैं बाद में खा लूँगा। तो मेरे पास रखकर कहने लगी बाद में खा लेना। मैंने केवल छाती पर ही चदर ओढी हुई तो उसने चदर को खींचा पैरों तक खींच कर चली गई। नींद से भरी आँखो में खुशी के आँशू आ गए। ऐसी होती बेटियाँ। सच आपने हम सबके दिल की बात कह दी है हनी के जरिये। मेरी आदत है रचना की अच्छी लाईन को निकालता हूँ पर यहाँ तो सारी लाईन दिल को छू रही है। कौन सी लाईन....। अभी नैना के आने के बाद उसका कमेट भी लिखूँगा। और हाँ हनी और वासु को हमारी तरफ से ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद देना।
ReplyDeleteबेहतरीन, लाजवाब
ReplyDeleteबरबस आपने मुझे अपनी बेटी का बचपना याद करा दिया, ये रचना दिल को छू गयी विजय जी
kisi bhi beti ke prati kisi sachche hriday meiN jo kuchh bhi umarh sakta hai wo sb aapne apni iss nek, paavan aur pavitaar kavita mei keh diya hai....
ReplyDeleteaapke iss jazbe ko baaram baar salaam karta hooN...
dr-asl betiyaaN hi to poore ghar ka aadhaar hoti haiN....
Maa-Shakti ka shuddh paavan swaroop
abhinandan svikaareiN. . . . .
---MUFLIS---
बेटी ईश्वर की अद्भुत सृष्टि है
ReplyDeleteईश्वर का वरदान है इंसान को बेटी
बेटी को जिसने पहचान लिया भावों में
इंसान की नैतिकता का सम्मान है बेटी।
विजय जी के भावों के जरिए पिता के भाव बेटी के प्रति सामने आए हैं। यह नजरिया यूनीवर्सल यानी शाश्वत है। यह भाव यदि पूरी सृष्टि में समा जाए तो इंसानियत रूपी क्रांति से सारी दुनिया महक जाए।
फिर मैं दरवाजे पर खड़ा हो कर ,
ReplyDeleteतेरी राह देखूंगा ;
तेरे बिना , मेरी होली कैसी , मेरी दिवाली कैसी !
तेरे बिना ; मेरा दशहरा कैसा ,मेरी ईद कैसी !
तू जब जाए ; तो एक वादा करती जाना ;
हर जनम मेरी बेटी बन कर मेरे घर आना ….
-दिल को छू गयी आप की यह कविता.बहुत सुन्दर!भाव भरी !
-यह तो बहुत ही सुन्दर तोहफा बिटिया के लिए है.
vijay ji kya likhun aapne to rula hi diya sachmuh sabhi betiyon ke liye uphar hai ye rachna.aap bahut bhavuk kar dete hin kavitaon se ...badhai ho
ReplyDelete[ अगर किसी मित्र को अपने छोटे बच्चे पर कोई कविता लिखवाना है तो मुझे कहियेगा , मैं जरुर लिख दूंगा ]...
ReplyDelete.....Vah kay kavita hai aapki, bas yahi shukr tha ki rulai nahi phooti//aur doosron ke liey kuch karne ka zazba hi asli zazba ha...
waahhhh,
ReplyDeleteye hui naa baat, kya behtreen likhaa he aapne...
pichhle 20 dino se bahar tha isliye blog duniya se door raha..
aaj hi aaya hu..
ab baate bhi hongi...
मात-पिता की आखों के आईने में यारो
ReplyDeleteमैं साठ-बरस का होकर भी बच्चा ही रहता हूं
श्यामसखा‘श्याम’
Behad khushnaseeb bitiya jo uska pita uske liye istarahse likhe...
ReplyDeleteZindageeme aage chalke ye lamhen uske liye pattharkee lakeerkee tarah manaspatalpe bas jayenge....ek amit yaadgaar...jo waqt tak nahee hata payega...
bohot, bohot badhayi...
Bahetareen !!!! vijayji, aapne bitiya ke liye itna badhiya likha hai ki hame ab ek darr sa lagne laga hai ki kal jab hamari bitiya ki shaadi ho jaayegi to hum uske bina kaise jeeyenge??
ReplyDeleteबेटी -- बिटिया
ReplyDeleteबहुत खूब बहुत सुन्दर्
bahut hi pyari kavita haidil ko chu lene wali.
ReplyDeleteBitiya ,bahut marmik rachna ...bahut sundar bhaav ...
ReplyDeleteDr. Rama Dwivedi
Beautiful
ReplyDelete