Tuesday, March 31, 2009

अपना अफसाना


बहुत दिनों से ये चाह रहा था ;
कि, अपना अफसाना लिखूं...

और मेरा अफसाना भी क्या है
कुछ तेरे जैसा है , कुछ उसके जैसा है

दुनिया की भीड़ में भटकता हुआ
ज़िन्दगी के जंगल में खोया हुआ
किसी बच्चे की हंसी में मुस्कराता हुआ
और अपनी उदासी को समेटता हुआ
एक अदद इंसान की रूह में फंसा हुआ
अपने आप को तलाशता हुआ !

बस ऐसा ही कुछ मेरा अफसाना है ;
इसी अफ़साने से ही तो मेरी कविता जन्मती है !!

कहीं अगर मैं मिलूं तुम्हे तो मुझे पहचान लोंगे ना ?


15 comments:

  1. sach afsana sabka ek sa hi hota hai sirf shabd juda hote hain...........jab afsane ek hote hain to na pahchanne ka to sawaal hi nhi uthta kyunki dil ke jazbaat bhi to ek hi hote hain.

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  2. afsaane ko sahi shabd diya hai aapne...badhiya bhavabhibyakti ... sundar prastuti...


    arsh

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  3. आपका ये अफसाना याद करेगा आपका ये यार।

    और मेरा अफसाना भी क्या है
    कुछ तेरे जैसा है , कुछ उसके जैसा है

    बिल्कुल सही कहा। वैसे ये फोटो किसकी लगाई है आपने :-)

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  4. इन्ही अफसानों से कविता बनती है सही कहा आपने बहुत अच्छा लिखा है ..पसंद आया बहुत

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  5. जिंदगी के अफ़साने अक्सर सुख और दुःख का मिश्रण होते हैं
    अपने आप को अक्सत इंसान उन लम्हों में ढूंढता है
    sundar kavit है आपकी

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  6. बेहतरीन रचना को जन्‍म दिया है आपके अफसाने ने पढकर अच्‍छा लगा बधाई

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  7. afsaana har hamesh kuchh na kuchh jnmata hi he...chahe kavita yaa kathaa..

    bahut sundar

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  8. और मेरा अफसाना भी क्या है
    कुछ तेरे जैसा है , कुछ उसके जैसा है
    बेहतरीन रचना को जन्‍म दिया है आपके अफसाने ने पढकर अच्‍छा लगा

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  9. और मेरा अफसाना भी क्या है
    कुछ तेरे जैसा है , कुछ उसके जैसा है

    wakai apke kaya ho gaye....

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  10. अफ़साने कम ज्यादा एक से ही होते हैं मेरे तेरे सबके...अच्छी रचना...लिखते रहें.
    नीरज

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  11. अति सुंदर कविता,,,,,
    इसी वाली शर्ट में मिलेंगे तो आपको अवश्य ही पहचान लूंगा,,,,::::))))

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  12. आपको नहीं पहचान सकते

    अभी तो खुद को भी पहचान

    पाए नहीं हैं हम अभी तक

    फिर कैसे पहचानेंगे आपको।

    जो आपको पहचानने का

    कर रहे हैं दावा

    वे अपने को भी पहचानते

    होंगे अपनी शर्ट से।

    आप ऐसा ही लिखते रहिए

    इससे बढि़या मत लिखिएगा

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  13. एक अदद इंसान की रूह में फंसा हुआ
    अपने आप को तलाशता हुआ !

    ek kavi aise hi banta hai.apni hi khoj mein rah kar..

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  14. वाह वाह क्या बात है! बहुत ही उम्दा कविता लिखा है आपने!

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