Monday, November 10, 2008

सर्द रातें

सर्द रातें

इन सर्द रातों में ,तुझे कुछ याद हो न हो .....
मुझे तो सारी बातें याद है.......
अब तक , जो तेरे - मेरे साथ गुजरी , और जो नही गुजरी ...
वो सब कुछ याद है ...
और अब मेरे आंसू ओस की बूंदे बन जाती है ..

ऐसी ही एक सर्द रात थी , जब हम कहीं मिले
और एक मुलाकात से दुसरे मुलाकात की बात बनी ..

ऐसी ही एक सर्द रात में तेरे आंसुओ ने मेरी पलकों को भिगोया था ..
और सारी रात हमने कोई पुरानी सी ग़ज़ल सुनी थी ..

ऐसी ही एक सर्द रात में हमने रात भर आलाव तापा था ,
और ज़िन्दगी की राख की आग को अपने जिस्मो पर सहा था......

ऐसी ही एक सर्द रात में हमने वो पुरानी कसमे खायी थी ..
जिनमे मिलने और मिलकर साथ रहने की बातें होती है ..

ऐसी ही एक सर्द रात में तुमने मेरा हाथ एक अँधेरी सड़क के
सूने मोड़ पर छोडा था ..
और मैं तन्हाई का तमाशबीन बन कर रह गया था ..

और उस सर्द रात से , आज तक मुझे हर रात , सर्द रात नज़र आती है ..
मैं तुम्हे याद करता हूँ और अपने आंसुओं से ओस की बूंदे बनाता हूँ...

खुदा जाने, तुम्हे अब ये रातें सर्द लगती है या नही ..
खुदा जाने , तुम्हे अब मेरी याद आती है या नही....
खुदा जाने ,अब किसी सर्द रात को हम दोबारा मिलेंगे या नही ...

आज की रात बहुत सर्द है ..

मालूम होता है ,
मेरी यादो के साथ मेरी जान लेकर जाएँगी...
तब , शायद, किसी सर्द रात को , तुम्हे मेरी याद आयें......

7 comments:

  1. vijay ji,
    aapne apani yaadon ko abhi tak taza bana kar rakha hai....bahut khobsurati se dil ke jazbaat likhe hain.
    badhai

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  2. ऐसी ही एक सर्द रात में तुमने मेरा हाथ एक अँधेरी सड़क के
    सूने मोड़ पर छोडा था ..
    और मैं तन्हाई का तमाशबीन बन कर रह गया था ..
    sabd ji uthe hain vijay ji...wah!

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  3. खुदा जाने, तुम्हे अब ये रातें सर्द लगती है या नही ..
    खुदा जाने , तुम्हे अब मेरी याद आती है या नही....
    खुदा जाने ,अब किसी सर्द रात को हम दोबारा मिलेंगे या नही ...

    ye lines bahut hii achii hain sir

    weldone ......
    umeed hai kii aapse future me kuch aisi hii achii poems padhne ko milengii ..........

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  4. vijay jii...
    "sard raatein.." ye title hi apne aap me bahut kuch kah jaata hai...
    har line aisi hai...mano ab ro padegii....mujhe nahut achhi lagi....

    aapki kavitayein bahut umda hoti..hain.....aapse kaafi kuch sikhne ko milega...

    meri galatiyon k baare me bhi jaroor batayigaa.....
    ...thanq

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  5. kuch raatein aisi hi hoti hain yaadon ki tarah ya kaho yaadein aisi hoti hain raton kii tarah sard.

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  6. आपकी ये सर्द राते भाव विभोर कर गई विजय जी।
    यादें होती ही हैं याद आने के लिए,जिए उन लम्हों को ताजा कर जाती है।बहुत ही खुबसूरती से शब्दों को भावों में पिरोया है।

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