Tuesday, December 9, 2008

मौत

दोस्तों , पेशेखिदमत है मेरे दो creations . मेरा बनाया हुआ sketch जो कि; मैंने 1985 में बनाया था , और एक नज़्म , जो कल लिखा .... जिंदगी के अपनी परिभाषा होती है ,और अलग अलग समय में देखने का नजरिया भी अलग होता है.... देखते है ये आपको पसंद आता है या नही ... मैं अपनी हर कविता के साथ एक sketch बनाता हूँ , जो relative सा होता है ........
मौत

जिंदगी का बोझ अब सहा नही जाता
सोचता हूँ मर ही जाऊं !!

पहले
ज़रा अपने हाथो में तेरा चेहरा संभाल लूँ
ज़रा तेरे होंठो को मेरे दिल में जगह दे दूँ
ज़रा तेरी आंखों को अपनी यादों में समेट लूँ
और आख़िर में ;
तू मुझे अपने जुल्फों से ढक ले !

मेरे रब , अब मुझे तू मौत दे ही दे...!!!

9 comments:

  1. आपकी कविता बहुत पसंद आयी!

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  2. अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं।बधाई।

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  3. bahut sunder sketch aur rachana

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  4. जिंदगी का बोझ अब सहा नही जाता
    सोचता हूँ मर ही जाऊं !!
    "very painful words to read"

    regards

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  5. dono hi behad bhav bhare hai skething ke sath sath rachanawon me creating bahot hi kam dekhane ko milta hai bahot bahot badhai aapko.. sath me aapka dero swagat hai mere blog pe ummid hai aapka sneh nirantar bana rahega....

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  6. जब हाथों में किसी का चेहरा सभाल जाए....होंठ दिल में जगह पा जायें...यादें आंखों में सिमट आयें और...कोई अपनी जुल्फों से धक् ले तो...उस के बाद बचता ही क्या है जिन्दा रहने को...बेहतरीन रचना...
    नीरज

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  7. बहुत सुंदर चित्र और कविता हैं.

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  8. चित्र और रचना दोनों ही बहुत पंसद आये... बधाई...

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  9. Maut kavita achchhee ban padee
    hai.kavita mein mun ka shasvat
    dard nihit hai

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