Wednesday, December 24, 2008

मुदद्त


आज मुझे तुम अचानक ही दिख गई
कई बरस बाद.....

एक मुददत के बाद .........

यूँ लगा कि जैसे आकाश में
मेघ घुमड़ घुमड़ कर नाचे हो !
यूँ लगा कि बड़े दिनों बाद ,
मनभरी बारिश हुई हो !
यूँ लगा कि जैसे मैंने तुम्हे
पहली बार देखा हो ...!

तुम्हे याद है ....वो दिन ...
ऐसे ही किसी मोड़ पर तुमने ;
मुझे मुस्करा कर देखा था ...

वो सारी रात मैंने अपने दोस्तों के साथ जाग कर बितायी थी ...
रात भर हमने सिर्फ़ तुम्हारे बारें में ही बातें की थी....
दोस्त सारी रात मुझे तेरे नाम से छेड़ते रहे थे ...
और मैं ,अपने आँखों में तेरे ख्वाब सज़ा रहा था.....

सच , खुशियाँ भी कितनी अच्छी होती है ...

तुमने ....शायद उस दिन भी हरे रंग का कुर्ता पहना था...
तुम्हारा वो उड़ता हुआ दुपट्टा ;
क्या कहूँ ... मैंने अपने आपको उसमे ओढ़ लिया था ..

उस दिन के बाद , कितने सारे दिन ,
यूँ ही हम दोनों ने ;
ख्वाबों का आशियाँ बनाते सजाते ,
ज़िन्दगी के सपनो को दिल से जिया था ....

प्यार !
सच में ज़िन्दगी को जीने के काबिल बना लेता है ..
मैं , तेरे लिए दुनिया सजाने , दुनिया में निकल पड़ा ...
ज़िन्दगी की उम्र को जैसे पंख लग गए हो...

फिर , बड़े बरसो बाद ,मैं जब तुझसे मिला
तेरे लिए बनी हुई ज़िन्दगी की सजावट को लेकर ;
तो तुम्हे किसी दुसरे रंग में देखा था ..
मेरी पानी से भरी धुंधलाती हुई आँखों को
आज तक तेरा वो लाल रंग याद है ...

ज़िन्दगी के मायने अलग है !

एक बार फिर ; मैं सारी रात दोस्तों के साथ था ..
फिर, रात भर हमने सिर्फ़ तुम्हारे बारें में ही बातें की थी....
दोस्तों ने कहा , तुझे भूल जाएँ !
कोई तुम्हे ; कैसे भूल जाएँ !

और मैं ,
जिस ज़िन्दगी को सजाने निकला था ,
उसी ज़िन्दगी की अर्थी को अपने कंधो पर लादकर चल पड़ा....

लेकिन ,सच में ;
आज , तुझे देख कर
बड़ा सकून मिला....
तुम कितनी खुश थी.....
मुझे बड़ी मुदद्त के बाद तेरी खुशी देखने को मिली...!!!

लेकिन ,
मुझे देख कर तुम रो क्यों पड़ी ?


19 comments:

  1. मेरी भी आंखें भर गई

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  2. mujhe dekh kar tum ro kyun padin..............isi mein sari kavita chupi hai

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  3. लेकिन ,
    मुझे देख कर तुम रो क्यों पड़ी ?

    बहुत बढ़िया जी ..

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  4. sach dil ko chu iya,bahut sundar

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  5. A research has now proved that true love never dies. Researchers mapped the brains of recently in love couples and those couples, who were in love two or three decades back.
    To their surprise when both the groups are shown the photographs of their first flame, they showed similar brain activity and same centers of their brains showed heightened activity.

    Although I tried to give empirical facts; the fact is you wrote an exceptional poem.

    thanks

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  6. विजय जी, आपकी ये नज्‍म प्रभावित करती है...एक अच्‍छी रचना के लिए बधाई...!

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  7. सच ये तो पसंद भी आई, दिल के पास तक भी पहुँच गई। और भावुक भी कर गई।
    लेकिन ,
    मुझे देख कर तुम रो क्यों पड़ी ?

    अद्भुत।

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  8. बड़ा सकून मिला....
    तुम कितनी खुश थी....
    मुझे बड़ी मुदद्त के बाद तेरी खुशी देखने को मिली...!!!
    sacha pyar isi ko kahte hai jo dusre ki khushi me apni khushi dhund le

    ek aachi rachna ke liye badhai

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  9. sahaj shabdon me bhaavpoorn rachna man ko chhoo gayi.Bahut sundar.

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. क्या बात है हम नाराज हैं आपसे सबको रुलाते हो और ख़ुद भी भावुक होते हो.....
    अच्छा ;लगता है??
    भावनाओं से ओत-प्रोत...
    बहुत अच्छा लेखन/.......


    अक्षय-मन

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  12. जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई ,
    आप क्यूं रोये
    ये नगमा यादा आ गया
    भावपूर्ण कविता है
    लावण्या

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  13. हर बात सीधे दिल से निकली हुई सी लगती है। दिल से निकलकर सीधे दिल को ही छूती है। ...बहुत अच्छी रचना।

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  14. भावस्पर्शी कविता.
    आप मेरे ब्लोग पर आये , धन्यवाद.देर से धन्यवाद दे रहा हूं. पर .....

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  15. विजय जी,

    किसी पहले प्यार की पूरी प्रोसेस को जिया है इस कविता ने. कम से कम पढने वाला गुजरने लगती है उन्हीं गलियों से जहाँ वो प्यार(चाहे एक तरफा ही रहा हो) गुम हो गया या किसी और का हुआ.

    बड़ी ही शिध्द्त से लिखा है, मनभरी बरसात/ दुप्पटे के प्रयोग में मैने अपने आपको ओढ लिया था बहुत ही अच्छी उपमांए दी हैं. बधाई.

    मुकेश कुमार तिवारी

    आपका मेरे ब्लॉग "कवितायन" पर आने और अपनी टिप्पणी देने का शुक्रिया.

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  16. MashaAllah! aakhir ki line punch line hai janab!
    bahut hee khub...daad kabool farmayein!!!
    likhte rahein
    fiza

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  17. Bahut sadhe hue shabado me manvi bhawanao ko vyaqt kiya hai. ek achchi rachana.

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  18. बड़ा सकून मिला....
    तुम कितनी खुश थी....
    मुझे बड़ी मुदद्त के बाद तेरी खुशी देखने को मिली...!!!

    its just brilliant...

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  19. बहुत सुन्दर रचना।
    आपकी पुरानी नयी यादें यहाँ भी हैं .......कल ज़रा गौर फरमाइए
    नयी-पुरानी हलचल
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/

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