Tuesday, December 23, 2008

कोई एक पल

कोई एक पल

कभी कभी यूँ ही मैं ,
अपनी ज़िन्दगी के बेशुमार
कमरों से गुजरती हुई ,
अचानक ही ठहर जाती हूँ ,
जब कोई एक पल , मुझे
तेरी याद दिला जाता है !!!

उस पल में कोई हवा बसंती ,
गुजरे हुए बरसो की याद ले आती है


जहाँ सरसों के खेतों की
मस्त बयार होती है
जहाँ बैशाखी की रात के
जलसों की अंगार होती है

और उस पार खड़े ,
तेरी आंखों में मेरे लिए प्यार होता है
और धीमे धीमे बढता हुआ ,
मेरा इकरार होता है !!!

उस पल में कोई सर्द हवा का झोंका
तेरे हाथो का असर मेरी जुल्फों में कर जाता है ,
और तेरे होठों का असर मेरे चेहरे पर कर जाता है ,
और मैं शर्माकर तेरे सीने में छूप जाती हूँ ......

यूँ ही कुछ ऐसे रूककर ; बीते हुए ,
आँखों के पानी में ठहरे हुए ;
दिल की बर्फ में जमे हुए ;
प्यार की आग में जलते हुए ...
सपने मुझे अपनी बाहों में बुलाते है !!!

पर मैं और मेरी जिंदगी तो ;
कुछ दुसरे कमरों में भटकती है !

अचानक ही यादो के झोंके
मुझे तुझसे मिला देते है .....
और एक पल में मुझे
कई सदियों की खुशी दे जाते है ...

काश
इन पलो की उम्र ;
सौ बरस की होती ................




24 comments:

  1. काश
    इन पलो की उम्र ;
    सौ बरस की होती ...............

    काश सिर्फ़ काश होता है ...बेहद खूबसूरत लिखा आपने

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  2. बहुत सुंदर लिखा है आपने...क्षणिक होते हें ऐसे पल...बीतने पर याद आते रहते हैं...बधाई।

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  3. जहाँ सरसों के खेतों की
    मस्त बयार होती है
    जहाँ बैशाखी की रात के
    जलसों की अंगार होती है

    बहुत खूब।

    काश
    इन पलो की उम्र
    सौ बरस की होती

    ये जो काश है ना, ये लोगो की जान ले लेता है जी।

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  4. बहुत ही आकर्षक रचना है......

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  5. वाह ! सुंदर भावानुभूति और सराहनीय अभिव्यक्ति.

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  6. yeh kash insan ki jan le leta hai.........kash sab vaisa hi hota jaisa hum chahte............har pal zindagi ka koi na koi lamha samete huye hai to phir yadon ke kamre mein to hum ta-umra bhatakte hi rahenge na

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  7. KAASH IN PALON KI UMAR SAU SAAL HOTI......
    KAASHHHH..
    SUNDAR NAZM....
    BADHIYAA SKERCH KE SAATH..
    BAHUT ACHCHHE...

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  8. बढिया है । अंत पसंद आया ।

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  9. बहुत सुँदर भावोँ से सजीअनुभूति कविता मेँ ढली है यूँ ही लिखते रहीयेगा

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  10. काश
    इन पलो की उम्र
    सौ बरस की होती
    ये बात हुई ये एहसास दिल को छूता है अगर ये दो पंक्तियाँ ही लिख देते आप तो पूरी रचना बन जाती वाकई बहुत ही उन्दा लिखा है जनाब जी

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  11. kaash in palo ki umra sou baras hoti....

    kavita ki drashti me aapki kavita achchi he magar mujhe esa kyu bar bar lagta he ki kavitao me ras marta jaa raha he aour jo kuch bi aaj he vo apne shabdo ke jaal bunane me lage hue he..jaal me aadmi fnsta he magar use ras nahi milta...vo chhtpatata he kintu use kavya ras prapt nahi hota...
    main bhi chhatpatata hu..jaal me fnsa hu..
    ummid karta hu aapki kalam sirf shabdo ko nahi bunegi balki shahad bhi gholegi
    amitabh

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  12. very nice !!
    काश
    इन पलो की उम्र ;
    सौ बरस की होती .

    ye kash hi ehsas hai
    umeed hai aage bhi umda rachanye aapki janib se aati rahengi

    with regards
    amitabh

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  13. प्रेम की गहरी सम्वेदना है। बधाई

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  14. sirf itna kehna hai kii...

    kaash in palon kii umra
    sau aras kii hotii ....

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  15. काश
    इन पलो की उम्र ;
    सौ बरस की होती .......

    sach mein bahut hi sundar rachna hai...yaaden hoti hi hain aisee...damaan se lipati rahti hain hamesha..ye--kash na jane kitna kuchh samet leta hai khud mein..ati sundar abhivyakti!

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  16. Bahut hee achchhee rachna hai.
    Badhaaee.

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  17. bayaan zindagi ka koi vark kar diya, mai jisse anjaan na tha usse vaakif kar diya!

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  18. bahut khub...insaan bhi kitna laalchi hota hai aur khudgarz bhi jab ose pyaar ho jaata hai ,...:)
    kash sau baras ki hoti :)
    bahut khub...mujhe woh painting bhi bahut khub lagi Vijay ji...
    daad kabool farmayein
    fiza

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